सोनीपत। सोनीपत नगर निगम चुनाव को लेकर घोषित वार्ड आरक्षण ने राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। नए आरक्षण फार्मूले के चलते कई मौजूदा पार्षद चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं, जबकि कई नेताओं को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। कुछ पार्षदों की जगह अब उनकी पत्नियां या परिवार की महिलाएं राजनीतिक विरासत संभालती नजर आएंगी। वहीं, कई दिग्गजों की नजर अब मेयर पद के आरक्षण पर टिकी है, जिससे उनका भविष्य तय होगा।
वार्ड नंबर-1, जो पहले पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था, इस बार सामान्य कर दिया गया है। ऐसे में वर्तमान पार्षद हरिप्रकाश सैनी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। वहीं वार्ड-9 के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने से मौजूदा सीनियर डिप्टी मेयर के लिए वहां से चुनाव लड़ना संभव नहीं रह गया है, उन्हें नया वार्ड तलाशना होगा।
आरक्षण के चलते कई अन्य पार्षदों को भी झटका लगा है। वार्ड-10 पिछड़ा वर्ग-ए पुरुष के लिए आरक्षित होने से ममता लूथरा को रणनीति बदलनी पड़ेगी। वार्ड-11 के बीसी-बी के लिए आरक्षित होने से इंदु वलेचा की राह भी कठिन हो गई है। वार्ड-12 महिला सामान्य के लिए सुरक्षित होने से लक्ष्मी नारायण तनेजा के लगातार दूसरी बार जीतने की उम्मीदों पर ब्रेक लग गया है।
इसी तरह वार्ड-13 के ओपन होने से मौजूदा महिला पार्षद संगीता सैनी को झटका लगा है, जबकि वार्ड-14 महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने से सूर्य दहिया को नए समीकरण तलाशने पड़ेंगे। वार्ड-16, जो पहले महिला के लिए आरक्षित था, अब ओपन हो गया है, जिससे मोनिका की राह आसान नहीं रही।
एकमात्र निर्दलीय पार्षद मुकेश सैनी का वार्ड-5 इस बार सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने से वे भी दौड़ से बाहर हो गए हैं। परिवार की महिला भी चुनाव नहीं लड़ सकेगी। वहीं वार्ड-17 से जुड़े नवीन तंवर अब वार्ड-18 के अनुसूचित जाति महिला आरक्षण के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, लेकिन उनकी पत्नी मैदान में उतर सकती हैं।
हालांकि कुछ पार्षद आरक्षण बदलाव से अप्रभावित रहे हैं। वार्ड-3 से भाजपा समर्थित सुरेंद्र मदान, वार्ड-5 से मुनीराम और वार्ड-15 से अतुल जैन अपने-अपने वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे।
नगर निगम क्षेत्र की कुल जनसंख्या 4,05,275 है, जिसमें 83 हजार बीसी-ए, 20,953 बीसी-बी और 59,224 अनुसूचित जाति की आबादी शामिल है। इन आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय होने से इस बार चुनाव बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है।