Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के कार्यकाल और अधिकारों को लेकर सियासत और प्रशासन के बीच खींचतान तेज हो गई है। पंचायत चुनावों से पहले प्रशासक नियुक्त करने के हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में आज प्रदेश भर से करीब 400 पंचायत प्रधान शिमला पहुंचे। ये प्रधान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात करेंगे और अपनी मांगें सीधे उनके समक्ष रखेंगे।
शिमला में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए पंचायत प्रधानों ने जोर देकर कहा कि वे चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं और अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रशासक से कहीं बेहतर समझते हैं। उनका कहना है कि जब तक नए पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक पंचायतों की शक्तियां उनसे नहीं छीनी जानी चाहिए। प्रधानों ने विशेष रूप से आपदा प्रबंधन के कार्यों का हवाला दिया। प्रदेश में आपदा अधिनियम के तहत राहत और पुनर्निर्माण का काम जारी है, ऐसे समय में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मांग की कि 31 जनवरी के बाद भी पंचायत प्रधान अपने अधिकारों के साथ काम करते रहें।
प्रधान मीना वर्मा ने कहा, “प्रशासक केवल दफ्तर समय में उपलब्ध रहते हैं, जबकि पंचायत प्रधान 24 घंटे जनता के बीच रहते हैं। हम लोगों की समस्याओं को जमीन पर समझते हैं। जब पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो सरकार को चाहिए कि प्रधानों का कार्यकाल चुनाव होने तक बढ़ाया जाए।”प्रधानों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद ग्रामीण एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से भी भेंट करने और उन्हें ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है। ग्राम विकास खंड बल्ह के अध्यक्ष चरण सिंह ठाकुर ने कहा कि हाल ही में कई विकास कार्यों के इस्टीमेट पास हुए हैं, जो आपदाओं के कारण रुके हुए थे। अगर हमारा कार्यकाल समाप्त हो गया तो गरीब और जरूरतमंद लोगों के काम फिर से रुक जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासक एक अधिकारी होते हैं, जो गांव के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा को महसूस नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का वर्तमान कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है।हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार इसके बाद पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे।इसी फैसले के विरोध में पंचायत प्रधान महासंघ के अध्यक्ष बिजेंद्र चंदेल की अगुवाई में प्रदेश भर के पंचायत प्रतिनिधि आज शिमला पहुंचे और सरकार से लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखने और पंचायत प्रधानों को उनके अधिकार बनाए रखने की मांग की।बिजेंद्र चंदेल ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की नींव हैं और चुनाव तक उनके अधिकारों को बरकरार रखना न केवल कानूनी बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। प्रधानों ने सरकार से अपील की कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखते हुए जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके कार्यकाल के दौरान पूर्ण अधिकार दिए जाएं।