Manali, 20 January-:हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज पर्यटन नगरी मनाली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले विंटर कार्निवल-2026 का भव्य शुभारंभ किया। रंग-बिरंगी सांस्कृतिक झांकियों, लोक कला और उत्साह से भरे वातावरण के बीच मुख्यमंत्री ने इस आयोजन का विधिवत उद्घाटन करते हुए पर्यटन विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनसे मनाली सहित पूरे प्रदेश के पर्यटन परिदृश्य को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लगभग 300 सांस्कृतिक एवं थीम आधारित झांकियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये झांकियां विभिन्न क्षेत्रों की लोक संस्कृति, परंपराओं, साहसिक गतिविधियों और पर्यटन संभावनाओं को दर्शाती हुई माल रोड तक पहुंचीं, जहां मुख्यमंत्री ने स्वयं उनका अवलोकन किया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने इस आयोजन में भाग लिया, जिससे मनाली में उत्सव का माहौल देखने को मिला।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मनाली में 250 करोड़ रुपये की लागत से रिवर फ्रंट परियोजना विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। रिवर फ्रंट को आधुनिक सुविधाओं, हरित क्षेत्रों, पैदल पथ और सौंदर्यीकरण के साथ विकसित किया जाएगा, जिससे मनाली की पहचान एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में और सुदृढ़ होगी।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने परिधि गृह मनाली के नए भवन में पांच अतिरिक्त कमरों के निर्माण, मनाली क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा के लिए सात चिन्हित स्थानों पर सुरक्षा दीवारों के निर्माण, ओल्ड मनाली में दो करोड़ रुपये की लागत से पार्किंग सुविधा, तथा गांव सोलंग और कराल में भूस्खलन न्यूनीकरण कार्यों के लिए 25-25 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा भी की।मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और अतिथि-सत्कार की परंपरा के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। हर वर्ष करोड़ों पर्यटक प्रदेश का रुख करते हैं और राज्य सरकार का प्रयास है कि उनके अनुभवों को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार बनाया जाए। इसी उद्देश्य से विंटर कार्निवल जैसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि पर्यटन हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और राज्य सरकार इसे बहुआयामी रूप से विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश को प्राकृतिक, धार्मिक, साहसिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ‘ग्रीन हिमाचल बायोडायवर्सिटी पार्क’ तथा नदियों के किनारे हरित पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में नई इको-टूरिज्म नीति लागू की गई है, जिसके तहत नवंबर 2025 तक 11 इको-टूरिज्म साइटों का आवंटन किया जा चुका है, जबकि 27 अन्य साइटों की आवंटन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 245 ट्रैकिंग रूट चिन्हित किए गए हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप भी विकसित की जा रही है, जिसमें रूट जानकारी, सुरक्षा निर्देश और स्थानीय सेवाओं से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध होंगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में रोप-वे परियोजनाओं को भी गति दी जा रही है, जिससे यातायात दबाव कम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों में संशोधन किए गए हैं और ब्याज अनुदान योजना शुरू की गई है। होम-स्टे इकाइयों के लिए अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक के निवेश पर शहरी क्षेत्रों में तीन प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में चार प्रतिशत और जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जा रहा है। होम-स्टे पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत भी की गई है।पर्यटन को और सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों को वर्षभर हवाई संपर्क से जोड़ने हेतु हेलीपोर्ट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। कुल 16 नए हेलीपोर्ट विकसित करने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में हमीरपुर, कांगड़ा, चंबा, कुल्लू, मनाली, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में नौ हेलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार की प्रक्रिया भी प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा जिला को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा। देहरा उपमंडल के बनखंडी में लगभग 619 करोड़ रुपये की लागत से विश्वस्तरीय वन्य प्राणी उद्यान का निर्माण किया जा रहा है। वहीं शिमला जिले के कुफरी स्थित हसन घाटी में प्रदेश का पहला स्काईवॉक ब्रिज बनाए जाने का निर्णय लिया गया है।उन्होंने बागवानी, ग्रामीण और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि प्रदेश के जलाशयों में लग्जरी और एडवेंचर टूरिज्म की शुरुआत की गई है। गोविंद सागर झील में क्रूज, शिकारा, हाउस बोट, जेट-स्की और वॉटर स्कूटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं।