हैती । हैती में जारी राजनीतिक संकट के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए खुली चेतावनी दी है। वॉशिंगटन ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सत्ता में बैठे लोग देश को और अस्थिर करने की कोशिश करते हैं, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बनेगा। इस चेतावनी से हैती की राजनीति में तनाव और गहरा गया है।
अमेरिका ने हैती की ट्रांजिशनल प्रेसिडेंशियल काउंसिल को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वह मौजूदा सरकार की संरचना में किसी भी प्रकार का बदलाव न करे। हैती में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी बयान में कहा कि गैर-निर्वाचित परिषद यदि अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में सरकार बदलने का प्रयास करती है, तो इसे देश की सुरक्षा और स्थिरता के खिलाफ माना जाएगा और ऐसा कदम स्वीकार्य नहीं होगा।
अमेरिकी दूतावास ने यह भी चेतावनी दी कि जो लोग गिरोहों के हितों को आगे बढ़ाने वाली पहलों का समर्थन करेंगे, वे न केवल हैती बल्कि पूरे क्षेत्र और अमेरिका के हितों के विरुद्ध काम करेंगे। ऐसे मामलों में अमेरिका “उचित कार्रवाई” करने से पीछे नहीं हटेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रांजिशनल काउंसिल के कुछ सदस्यों और मौजूदा प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमी के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन मतभेदों के कारणों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग के वेस्टर्न हेमिस्फेयर ब्यूरो ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हैती की पुरानी अस्थिरता के पीछे भ्रष्ट राजनेताओं की अहम भूमिका रही है, जो गिरोहों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए करते हैं और फिर उसी अराजकता के नाम पर सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। विभाग ने कहा कि स्थायी समाधान केवल लोकतांत्रिक जनसमर्थन से ही संभव है, न कि हिंसा और भय के जरिए। बयान में यहां तक कहा गया कि इस रास्ते पर चलने वाले परिषद सदस्य देशभक्त नहीं, बल्कि गिरोहों के साथ साठगांठ करने वाले लोग हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर हैती के प्रधानमंत्री कार्यालय ने टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं, ट्रांजिशनल काउंसिल के प्रमुख लॉरेंट सेंट-सिर ने बयान जारी कर कहा कि वे 7 फरवरी से पहले सरकार की स्थिरता को कमजोर करने वाले किसी भी कदम के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि कार्यकाल के अंत में लिया गया कोई भी गैर-जिम्मेदार फैसला देश में भ्रम, अविश्वास और अराजकता को बढ़ा सकता है, जिसका सीधा असर पहले से संकट झेल रही जनता पर पड़ेगा।
हैती में राजनीतिक संकट कोई नया नहीं है। जुलाई 2021 में राष्ट्रपति जोवेनेल मोइसे की हत्या के बाद से देश लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है। अप्रैल 2024 में कैरिबियन देशों की मध्यस्थता से ट्रांजिशनल प्रेसिडेंशियल काउंसिल का गठन किया गया था, जब गिरोह हिंसा के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल हेनरी को इस्तीफा देना पड़ा था।
इस काउंसिल का मुख्य उद्देश्य नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति कर देश में स्थिरता बहाल करना था। फिल्स-एमी को नवंबर 2025 में तीसरे प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। काउंसिल का कार्यकाल 7 फरवरी 2026 को समाप्त होना है, लेकिन इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल जनवरी से नवंबर के बीच हैती में 8,100 से अधिक हत्याएं दर्ज की गईं, जबकि गिरोहों के नियंत्रण वाले इलाकों तक सीमित पहुंच के कारण वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने हैती के नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर संस्थागत निरंतरता बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। हालांकि मौजूदा हालात में सवाल यही बना हुआ है कि क्या हैती इस राजनीतिक खींचतान से बाहर निकल पाएगा या अस्थिरता का यह दौर और गहराएगा।