फरीदाबाद। जिले के सबसे बड़े गांव तिगांव में सीवर व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बिछाई गई सीवर लाइन ग्रामीणों के लिए राहत नहीं बन सकी। परियोजना को पूरा हुए डेढ़ साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन आज भी गांव की गलियों में गंदा पानी बह रहा है और सीवर लाइन बार-बार जाम हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि तीन साल तक चले निर्माण कार्य के दौरान उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन काम पूरा होने के बाद भी हालात नहीं सुधरे। सीवर लाइन कागजों में चालू है, जबकि जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का दावा है कि सीवर लाइन चालू है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक बहुत कम घरों को ही कनेक्शन दिए जा सके हैं। अधिकांश लोग मजबूरी में आज भी सोख्ता गड्ढों का सहारा ले रहे हैं, जिससे भूजल प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है।
गांव की कई गलियों में सीवर ओवरफ्लो की स्थिति बनी रहती है। जगह-जगह मैनहोल टूटे या धंसे हुए हैं, जबकि कई मैनहोल इंटरलॉकिंग टाइलों के नीचे दबा दिए गए हैं। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तिगांव-बल्लभगढ़ मुख्य मार्ग से मिर्जापुर एसटीपी तक करीब पांच किलोमीटर लंबी सीवर लाइन डाली गई है, लेकिन यह भी कई स्थानों से लीक हो रही है। शिकायत करने के बाद भी समाधान में लंबा समय लग रहा है।
ग्रीवेंस कमेटी और विधानसभा तक उठा मामला
ग्रामीण राजेश वर्मा और जयकिशन वर्मा ने इस समस्या को ग्रीवेंस कमेटी में भी उठाया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दो महीने में समाधान के निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदेश के राज्य मंत्री राजेश नागर ने भी अपने कार्यकाल में इस मामले पर नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को फटकार लगाई थी और ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश तक की थी।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सीवर लाइन की तकनीकी और वित्तीय जांच होनी चाहिए, क्योंकि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। वहीं विभागीय अधिकारी लीकेज और मैनहोल की मरम्मत का आश्वासन दे रहे हैं।ग्रामीणों की मांग है कि स्थायी समाधान किया जाए, ताकि तिगांव को गंदे पानी और बदबू से निजात मिल सके।