बहादुरगढ़। यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस कानून के विरोध में भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता और नेत्री मनीषा शर्मा ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मनीषा शर्मा ने यह कदम कानून को संविधान और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए उठाया है। उन्होंने जिला भाजपा अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में स्पष्ट किया कि यह अधिनियम देश की शिक्षा प्रणाली में असमानता को बढ़ावा देगा।
मनीषा शर्मा गांव खरहर की निवासी हैं और भाजपा संगठन में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। वे बूथ अध्यक्ष, छारा मंडल की मंडल सचिव और मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुकी हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि यूजीसी एक्ट 2026 संविधान के अनुच्छेद 14 के मूल सिद्धांतों के विपरीत है, जो समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है। उनका कहना है कि यह कानून शिक्षा के समान अवसरों को सीमित करेगा और सामाजिक व आर्थिक आधार पर भेदभाव को बढ़ा सकता है।
भाजपा नेत्री ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और इसमें किसी भी तरह की असमानता देश के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका यह फैसला किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि संविधान और छात्रों के हित में लिया गया है। मनीषा शर्मा का मानना है कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जो हर वर्ग के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करे।
इस इस्तीफे के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे यूजीसी एक्ट के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत बताया है, जबकि भाजपा संगठन की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज हो सकती है।