चंडीगढ़ | जनवरी माह में हुई तीसरी बारिश रबी फसलों के लिए राहत लेकर आई है। इस बारिश से खासतौर पर गेहूं, सरसों और चना की फसलों को बेहतर विकास का अवसर मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी में नमी बढ़ने से फसलों की जड़ों को मजबूती मिलेगी और पैदावार में बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि, कुछ जिलों में हुई हल्की ओलावृष्टि से सरसों की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर डागर ने बताया कि जनवरी में यह तीसरी बारिश है। इससे पहले माह की शुरुआत में और 23 जनवरी को भी बारिश दर्ज की गई थी। जनवरी के शुरुआती दो दिनों में 16.8 मिमी वर्षा हुई थी, जिसका सकारात्मक असर फसलों पर देखा गया। फिलहाल पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के कारण आगामी दिनों में बारिश की संभावना बेहद कम है।
गेहूं की पैदावार के लिए ठंडा मौसम अनुकूल
एचएयू के गेहूं विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि वर्तमान में गेहूं की फसल में बालियां नहीं निकली हैं और इस अवस्था में ठंडा मौसम पैदावार के लिए बेहद फायदेमंद होता है। उन्होंने कहा कि दिसंबर में बारिश न होने से गेहूं को नुकसान की आशंका थी, लेकिन जनवरी में हुई बारिश ने इस कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया है। इसका सीधा असर उत्पादन में बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिलेगा।
ओलावृष्टि से सरसों को खतरा, गेहूं सुरक्षित
डॉ. बिश्नोई ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की सूचना मिली है। मौजूदा समय में ओलावृष्टि से गेहूं को खास नुकसान नहीं होता, लेकिन सरसों की फसल में फलियों के भीतर दाना बन चुका है। यदि तेज ओलावृष्टि होती है, तो सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है।
नमी बढ़ी तो गेहूं में पीला रतुआ रोग का खतरा
कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बारिश और नमी वाला मौसम लंबे समय तक बना रहता है, तो गेहूं में पीला रतुआ रोग फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसका प्रभाव विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश से सटे जिलों में अधिक देखने को मिलता है। डॉ. बिश्नोई ने बताया कि एचएयू द्वारा विकसित नई गेहूं किस्मों में इस रोग का असर नहीं होता, लेकिन जिन किसानों ने पुरानी किस्मों की बुवाई की है, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है।
सब्जियों पर असर दो-तीन दिन में होगा स्पष्ट
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. कुलदीप श्योराण ने बताया कि सामान्य बारिश से सब्जियों को ज्यादा नुकसान नहीं होता है। हालांकि जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां नुकसान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फील्ड से पूरी रिपोर्ट आने में अभी समय लगेगा और आमतौर पर नुकसान का असर दो से तीन दिन बाद दिखाई देता है। गाजर, मूली और पालक जैसी सब्जियों पर असर कम रहने की संभावना है, जबकि टमाटर, मिर्च, बैंगन और गोभी की फसल को अधिक नुकसान हो सकता है।