नई दिल्ली | ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने हाल ही में यूजीसी के नए नियम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि शिक्षा का उद्देश्य समान अवसर प्रदान करना है, न कि जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देना।
विजेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में यूजीसी से अपील की कि इस नियम पर पुनर्विचार किया जाए और इसे तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्रों को जातिगत वर्गों में बांटना देश के भविष्य के लिए चिंताजनक कदम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कक्षा में बैठे युवा ही देश का भविष्य हैं और उन्हें समान अवसर और निष्पक्ष शिक्षा मिलनी चाहिए।
यूजीसी ने यह नया नियम 13 जनवरी 2026 को जारी किया था, जो 2012 के पुराने नियमों की जगह लेता है। नए नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ‘इक्विटी कमेटी’, ‘इक्विटी स्क्वॉड’, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि नियमों में ‘कास्ट-बेस्ड डिस्क्रिमिनेशन’ को SC/ST/OBC के खिलाफ परिभाषित किया गया है, कई लोग इसे जनरल कैटेगरी छात्रों के लिए असुरक्षा और विभाजनकारी मान रहे हैं।
विजेंद्र सिंह का यह विरोध शिक्षा में समान अवसर और जातिगत समरसता के महत्व पर नई बहस को जन्म दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श की आवश्यकता है, ताकि नियम छात्रों के हित में और निष्पक्ष रूप से लागू हों।