चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जासूसी के आरोपों में गिरफ्तार इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा की जमानत याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी को पूरा रिकॉर्ड लेकर 19 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
वीरवार को हुई सुनवाई के दौरान ज्योति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह ढुल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज एफआईआर ठोस तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कोर्ट से ज्योति के कथित चैट रिकॉर्ड तलब करने की मांग की, जिस पर हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि ज्योति मल्होत्रा मई 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। एफआईआर के मुताबिक, यह मामला मई 2025 में आई इंटेलिजेंस ब्यूरो की इनपुट रिपोर्ट से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2023 में नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा आवेदन के दौरान उनकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई थी और इसी दौरान भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों के आदान-प्रदान का संदेह जताया गया।
ज्योति पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, अपनी याचिका में उन्होंने खुद को एक पेशेवर ट्रैवल ब्लॉगर बताते हुए कहा है कि जो व्यक्ति खुलेआम कैमरे के साथ कंटेंट शूट कर सोशल मीडिया पर अपलोड करता है, उसे जासूस बताना पूरी तरह निराधार और अविश्वसनीय है। उनका तर्क है कि उनके खिलाफ अधिनियम की आवश्यक शर्तें—जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश या किसी प्रकार का स्केच/मॉडल बनाना—पूरी नहीं होतीं।
बचाव पक्ष ने हिसार एसपी शशांक कुमार सवान के कथित सार्वजनिक बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ज्योति के पास किसी भी सैन्य या रणनीतिक रूप से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच नहीं पाई। इसके अलावा, याचिका में बीएनएस की धारा 152 के प्रयोग को भी गलत ठहराया गया है, क्योंकि कथित घटनाएं वर्ष 2023 की हैं, जबकि नई दंड संहिता बाद में लागू हुई।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच रिकॉर्ड में ऐसे कोई कॉल या संदेश नहीं हैं, जो ज्योति और पाकिस्तानी अधिकारी के बीच सीधे संपर्क की पुष्टि करते हों। साथ ही, उन्होंने यह आधार भी रखा कि वह एक महिला हैं और अपने वृद्ध पिता व बीमार ताऊ की एकमात्र देखभालकर्ता हैं।
अब हाईकोर्ट अगली सुनवाई में जांच रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद जमानत याचिका पर आगे निर्णय करेगा।