चंडीगढ़। फरीदाबाद में गरीबी के कारण एक महिला के शव को मोटर चालित खुले ठेले पर गांव तक ले जाने की घटना पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानव गरिमा का गंभीर उल्लंघन बताते हुए राज्य के स्वास्थ्य तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। आयोग का कहना है कि ऐसी घटनाएं संवैधानिक मूल्यों और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर सीधा आघात हैं।
आयोग ने यह संज्ञान 30 जनवरी 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्ट के आधार पर लिया, जिसमें बताया गया कि 35 वर्षीय अनुराधा की बादशाह खान सिविल अस्पताल, फरीदाबाद में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार शव को घर ले जाने के लिए परिवहन शुल्क की व्यवस्था नहीं कर सका। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल या प्रशासन की ओर से शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके चलते उन्हें शव को खुले ठेले पर गांव सरूरपुर तक ले जाना पड़ा।
जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग, जिसमें सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया शामिल हैं, ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि गरिमा के साथ मृत्यु का अधिकार भी इसमें शामिल है। आयोग ने घटना के उस मार्मिक दृश्य का उल्लेख किया, जिसमें मृतका का वृद्ध ससुर ठेला चला रहा था और सात वर्षीय बेटा शव पर डाली चादर को उड़ने से बचाने के लिए पकड़े हुए था।
आयोग ने स्पष्ट किया कि सवाल यह नहीं है कि परिवार ने सहायता मांगी या नहीं, बल्कि यह है कि क्या राज्य के पास गरीब परिवारों के लिए सम्मानजनक शव परिवहन की कोई सुनिश्चित व्यवस्था मौजूद है। आयोग ने सरकार को सभी सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंदों के लिए निशुल्क शव परिवहन नीति लागू करने की सिफारिश की है।
इसके साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं और सिविल सर्जन फरीदाबाद से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तलब की गई है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।