नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक के अलंद स्थित लाडले मशक दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि के दौरान शिव पूजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला पहले से ही कर्नाटक हाई कोर्ट में लंबित है, इसलिए सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि जब संबंधित विवाद की सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है, तब सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।
यह मामला खलील अंसारी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें दरगाह परिसर और हिंदू संत राघव चैतन्य की समाधि के भीतर पूजा करने की अनुमति पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी आग्रह किया गया था कि किसी प्रकार की भीड़, गैरकानूनी प्रवेश और धार्मिक आयोजन को रोका जाए, ताकि विवादित स्थल पर स्थिति बिगड़ने से बचाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता दरगाह की संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करवाने जैसी मांग उठा रहा है, जिसका फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने संकेत दिया कि यह मामला उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित मंच पर ही तय होना चाहिए।
गौरतलब है कि लाडले मशक दरगाह को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए ऐतिहासिक रूप से श्रद्धा का स्थान माना जाता है। वर्ष 2022 में धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद यहां तनाव की स्थिति बनी थी।
इससे पहले फरवरी 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कुछ हिंदू श्रद्धालुओं को राघव चैतन्य शिवलिंग पर शिवरात्रि की पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद महाशिवरात्रि पर पूजा का रास्ता साफ माना जा रहा है।