फतेहाबाद। सिंचाई विभाग की खाली पड़ी भूमि पर किए गए व्यापक वृक्षारोपण अभियान ने जिले में सकारात्मक पर्यावरणीय बदलाव दर्ज किए हैं। विभागीय परिसरों में रोपे गए 15 हजार से अधिक पौधों के कारण यहां का तापमान बाहरी इलाकों की तुलना में करीब चार डिग्री तक कम पाया गया है। सघन हरियाली से विकसित यह क्षेत्र अब प्रदेश स्तर पर मॉडल के रूप में उभर रहा है।
विभाग ने इस पहल को पूरे हरियाणा में लागू करने का निर्णय लिया है। नहरों के किनारे और सिंचाई विभाग की खाली भूमि पर चरणबद्ध तरीके से वनीकरण किया जाएगा। मुख्यालय ने सभी जिलों से उपलब्ध सरकारी भूमि का विवरण मांगा है, ताकि राज्यभर में ग्रीन कॉरिडोर विकसित किए जा सकें।
फतेहाबाद के भूथनकलां, दरियापुर, चिम्मो, चांदपुरा और बलियावाला स्थित विश्राम गृहों, टोहाना नहर कॉलोनी तथा एसई आवास परिसर में पूर्व में बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया था। यहां लगाए गए आम, नीम, जामुन, अनार, किन्नू और अंजीर जैसे पौधे अब विकसित वृक्ष बन चुके हैं। घनी हरियाली के कारण परिसर अधिक छायादार और ठंडे बने हैं, साथ ही पक्षियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सिंचाई विभाग ने पौधारोपण को नियमित गतिविधि का रूप दे दिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के जन्मदिन, सेवानिवृत्ति और अन्य अवसरों पर पौधे लगाने की परंपरा विकसित की गई है। नहर पट्टियों पर योजनाबद्ध वृक्षारोपण को अतिक्रमण रोकथाम रणनीति से भी जोड़ा गया है।
अधीक्षण अभियंता ओपी बिश्नोई के अनुसार, इस मॉडल को प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी है। सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने सभी जिलों से विभागीय भूमि की रिपोर्ट लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा में वन क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 1.60 प्रतिशत है, जो देश में सबसे कम में गिना जाता है। ऐसे में नहर किनारों और सरकारी भूमि पर हरित क्षेत्र विकसित करना राज्य के 20 प्रतिशत हरित लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालिया नीतियों के तहत 75 प्रतिशत छायादार और 25 प्रतिशत फलदार या औषधीय पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसका सफल प्रयोग फतेहाबाद मॉडल में देखने को मिला है।
यह पहल न केवल तापमान नियंत्रण में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।