शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। सदन के बाहर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए RDG के मुद्दे पर उसका स्पष्ट रुख पूछ लिया। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि हिमाचल और “हिमाचलियत” से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।
उप मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार दिए थे। उन्होंने कहा कि कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से धन के बंटवारे की व्यवस्था स्पष्ट रूप से संविधान में की गई है और पर्वतीय राज्यों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सहायता का प्रावधान किया गया था। उनके अनुसार हिमाचल प्रदेश के गठन के समय यह स्पष्ट था कि भौगोलिक और संसाधन संबंधी चुनौतियों के कारण केंद्र सरकार की वित्तीय मदद आवश्यक होगी।अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्यों को कमजोर करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं बनाना था तो उनके गठन का उद्देश्य क्या था। उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य वित्तीय दबाव में आ गए। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब आरडीजी को समाप्त करने की चर्चा हो रही है, जो प्रदेश के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 17 में से 12 राज्यों की आरडीजी पर निर्भरता लगभग 1 प्रतिशत के आसपास है, जबकि हिमाचल की निर्भरता लगभग 13 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि नागालैंड की निर्भरता 17 प्रतिशत तक है, जबकि कर्नाटक की मात्र 1 प्रतिशत है। ऐसे में हिमाचल जैसे राज्यों के लिए आरडीजी अनिवार्य है।उन्होंने पूर्व जयराम सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कार्यकाल में प्रदेश को लगभग 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन और 54 हजार करोड़ रुपय आरडीजी के माध्यम से प्राप्त हुए थे।अग्निहोत्री ने कहा कि जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे,वही आज आरडीजी का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरडीजी को बंद करना हिमाचल के साथ अन्याय होगा और प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर मजबूती से अपनी बात रखेगी।