शिमला, संजू-:हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन राजस्व घाटा अनुदान (RDG) पर चर्चा के दौरान प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियां देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही हैं और छोटे राज्यों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत राजस्व घाटे वाले राज्यों को केंद्र से विशेष वित्तीय सहायता दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। उनका कहना था कि पहाड़ी और सीमांत राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं, जिसके कारण उनके खर्च अधिक और संसाधन सीमित होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार का दायित्व बनता है कि वह इन राज्यों को पर्याप्त आर्थिक सहयोग दे।राजस्व मंत्री ने 16वें वित्त आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त आयोग निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रहा और उस पर राजनीतिक प्रभाव दिखाई दे रहा है। नेगी ने कहा कि यदि छोटे राज्यों को उनका हक नहीं मिला तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हिमाचल के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी।उन्होंने प्रदेश भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें राज्य के हित में केंद्र पर दबाव बनाना चाहिए। नेगी के अनुसार, हिमाचल के विकास और वित्तीय सुदृढ़ता के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।
राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में भी राजस्व मंत्री ने भाजपा की रणनीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवार को आगे बढ़ाने की कोशिश समझ से परे है। नेगी ने आरोप लगाया कि पिछली बार दल-बदल और धनबल के जरिए लोकतांत्रिक मूल्यों को आघात पहुंचाया गया था। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव धनबल के आधार पर प्रभावित होंगे तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।जगत सिंह नेगी ने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों का पालन अनिवार्य है।