नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ड्रग तस्करों और नारको-आतंकवादियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ऑपरेशन सदर्न स्पीयर के तहत अमेरिकी सेना ने प्रशांत और कैरिबियाई सागर में नशीले पदार्थों की तस्करी कर रही तीन नावों को निशाना बनाया। इस हमले में कुल 11 लोगों की मौत हुई।
अमेरिकी दक्षिणी कमान के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी। दो नावों पर 4-4 लोग सवार थे, जबकि तीसरी नाव में तीन लोग थे। सभी नावों को समुद्र में नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें समुद्र के बीचों-बीच तस्करी कर रही नावों को निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है।
अमेरिकी दक्षिणी कमान ने बयान में कहा कि ये नावें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामित आतंकवादी संगठनों द्वारा संचालित थीं। ये केवल तस्कर नहीं थे, बल्कि नारको-टेररिस्ट (नशे के कारोबार से जुड़े आतंकवादी) थे। ऑपरेशन का उद्देश्य लैटिन अमेरिका से अमेरिका आने वाले ड्रग्स के रास्तों को रोकना और तस्करी से जुड़ी आतंकवादी गतिविधियों को समाप्त करना है।
ऑपरेशन सदर्न स्पीयर सितंबर 2025 से चल रहा है। अब तक इस अभियान में कम से कम 145 नारको-टेररिस्ट मारे जा चुके हैं। अमेरिकी प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई बता रहा है।
हालांकि, इस ऑपरेशन ने मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। बिना कानूनी ट्रायल के समुद्र में लोगों को निशाना बनाने के चलते विवाद और तनाव बढ़ गया है। वेनेजुएला पर हालिया सैन्य दबाव के बाद इस अभियान ने पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा तनाव को और तेज कर दिया है।