फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सोमवार को जिला नगर योजनाकार (एन्फोर्समेंट) विभाग की टीम ने मास्टर रोड किनारे वर्ल्ड स्ट्रीट के पास बने बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, फूड जंक्शन और स्पोर्ट्स एकेडमी सहित कई निर्माणों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की।
कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर शीशे तोड़े गए, जबकि कई जगह लकड़ी की सजावटी रेलिंग, झोपड़ी और अस्थायी ढांचे हटाए गए। हालांकि विभाग ने दावा किया कि करीब चार एकड़ क्षेत्र से अवैध निर्माण तोड़े गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर अब भी कई पक्के निर्माण जस के तस मौजूद हैं। आरोप है कि कई निर्माणों तक अर्थमूवर पहुंचा ही नहीं, जिससे कार्रवाई को सिर्फ दिखावा बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार मास्टर रोड किनारे की अधिकांश जमीन किसानों की है, जिस पर नियमों के तहत केवल खेती की जा सकती है। इसके बावजूद कई किसानों द्वारा जमीन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है या फिर इसे किराये पर दे दिया गया है। इसी कारण यहां बड़े स्तर पर बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक निर्माण खड़े हो गए हैं। इन निर्माणों के लिए न तो सीएलयू (भूमि उपयोग परिवर्तन) कराया गया है और न ही नक्शा पास कराया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इन अवैध निर्माणों की पूरी जानकारी होने के बावजूद अक्सर सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूरी कर दी जाती है। आरोप लगाया जा रहा है कि राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे अवैध निर्माणकर्ताओं के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं।
अवैध निर्माणों की वजह से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इलाके में ट्रैफिक जाम, पार्किंग समस्या, ध्वनि प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ते जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकार को टैक्स और लाइसेंस शुल्क के रूप में राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
जहां कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया, वहां अब फ्रंट साइड को काले और लाल कपड़े से ढक दिया गया है। इससे अंदर की गतिविधियां सड़क से नजर नहीं आ रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही टूटे हिस्सों की मरम्मत कर दोबारा गतिविधियां शुरू कर दी जाएंगी।
कन्फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए ग्रेफा के चेयरमैन निर्मल कुलश्रेष्ठ ने कहा कि ऐसी कार्रवाई में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि अवैध निर्माणों पर सीलिंग और भारी जुर्माना लगाया जाए तथा शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए, ताकि अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके।
वहीं, पुरी प्रणायाम के प्रधान निशांत रस्तोगी ने कहा कि अवैध निर्माणों से सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान होता है। सरकार को इस मामले में संज्ञान लेते हुए एक समान और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी को छोड़ा न जाए।
इस मामले में डीटीपीई यजन चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि अर्थमूवर जितनी ऊंचाई तक पहुंच सकती थी, वहां तक कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग के पास अधिक ऊंचाई तक तोड़फोड़ करने वाली मशीन उपलब्ध नहीं है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जहां कार्रवाई की गई है वहां मरम्मत संभव नहीं होनी चाहिए, और यदि दोबारा निर्माण किया गया तो फिर से कार्रवाई की जाएगी।