हमीरपुर, अरविन्द-:देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही इनफार्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस (ISEA) फेज-III परियोजना में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हमीरपुर सक्रिय और अहम भूमिका निभा रहा है। यह पहल मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसका लक्ष्य शिक्षा, अनुसंधान और जनजागरूकता के माध्यम से देश की डिजिटल सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करना है।
वर्ष 2024 से इस राष्ट्रीय परियोजना में शामिल एनआईटी हमीरपुर को देश के 50 प्रमुख संस्थानों के साथ 10 अलग-अलग क्लस्टरों में विभाजित किया गया है। इन क्लस्टरों के माध्यम से साइबर क्राइम, इंटरनेट सुरक्षा तंत्र, मोबाइल डिवाइस सुरक्षा और उभरते डिजिटल खतरों पर शोध कार्य किया जा रहा है। संस्थान विशेष रूप से मोबाइल डिवाइस सिक्योरिटी और संबंधित डोमेन पर अनुसंधान कर रहा है।परियोजना का नेतृत्व कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रधान अन्वेषक डॉ. टी. पी. शर्मा कर रहे हैं, जबकि सह-अन्वेषक के रूप में डॉ. नवीन चौहान सहयोग दे रहे हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में संस्थान द्वारा कई कार्यशालाएं, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, प्रशिक्षण सत्र और जागरूकता शिविर आयोजित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और साइबर खतरों से बचाव के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।उन्होंने कहा कि परियोजना का प्रभाव शैक्षणिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कई छात्रों को साइबर सुरक्षा में शोध के लिए प्रेरित किया गया है, जबकि जूनियर रिसर्च फेलो उभरते साइबर खतरों के समाधान और सिस्टम सुरक्षा को मजबूत करने पर कार्य कर रहे हैं।इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न समुदायों में आयोजित जागरूकता अभियानों के जरिए महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, मोबाइल सुरक्षा जोखिम और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ISEA फेज-III के माध्यम से एनआईटी हमीरपुर देश को सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।