नारनौल | अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वह सेवानिवृत्त हरियाणा रोडवेज कर्मचारी हजारी लाल को उनकी पत्नी के हृदय उपचार पर हुए 1,42,683 रुपये 9% वार्षिक ब्याज सहित चार महीने के भीतर अदा करे।
यह आदेश अतिरिक्त सिविल जज विक्रम जीत सिंह ने सिविल वाद हजारी लाल बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य के मामले में सुनाया। अधिवक्ता प्रमोद यादव ने बताया कि हजारी लाल 16 नवंबर 1974 से 30 मार्च 2003 तक हरियाणा रोडवेज में स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत रहे। मई 2018 में उनकी पत्नी को हृदय संबंधी आपात स्थिति के कारण जयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में कार्डियक सर्जरी सहित उपचार पर कुल 1,42,683 रुपये खर्च हुए। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया गया था, लेकिन विभाग ने स्टेंट का “स्टिकर” जमा न होने का आधार बनाकर भुगतान लंबित रखा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि अस्पताल के अंतिम बिल में स्टेंट का नाम, बैच नंबर और कीमत स्पष्ट दर्ज थी। कोर्ट ने माना कि दिशा-निर्देशों के अनुसार बैच नंबर या स्टिकर में से किसी एक का होना पर्याप्त है और तकनीकी आधार पर भुगतान रोकना उचित नहीं है।
अदालत ने आदेश दिया कि सरकार पूरी राशि वाद दायर करने की तिथि से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज सहित चार महीने के भीतर अदा करे। तय समय में भुगतान न होने पर वादी को विधि अनुसार निष्पादन कार्यवाही करने की अनुमति भी दी गई है।