शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय संसाधनों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए विधायक प्राथमिकता योजनाओं के नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार अब राज्य के विधायक आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी प्राथमिकता सूची में केवल एक ही नई योजना प्रस्तावित कर सकेंगे।
सरकारी निर्देशों के मुताबिक वास्तविक नई योजना (आरएनई) के तहत विधायक सड़क या पुल, लघु सिंचाई, ग्रामीण पेयजल अथवा सीवरेज से संबंधित योजनाओं में से केवल एक परियोजना को ही प्राथमिकता में शामिल कर पाएंगे। पहले विधायक इन क्षेत्रों में दो-दो नई योजनाएं प्रस्तावित कर सकते थे, लेकिन अब इन्हें घटाकर एक तक सीमित कर दिया गया है।
इसके साथ ही विधायकों को अन्य चार प्राथमिकताएं पहले से चल रही योजनाओं के मरम्मत और रखरखाव के लिए देनी होंगी। इनमें सड़कों या पुलों की मरम्मत, लघु सिंचाई परियोजनाओं का रखरखाव, ग्रामीण पेयजल और सीवरेज व्यवस्था से जुड़े कार्य तथा सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के रखरखाव से संबंधित योजनाएं शामिल रहेंगी।
सरकार के इस फैसले को प्रदेश की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सीमित बजट के चलते नई परियोजनाओं की संख्या कम की गई है ताकि पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने और उनके रखरखाव पर अधिक ध्यान दिया जा सके। हालांकि कुछ जनप्रतिनिधियों का मानना है कि नई योजनाओं की संख्या घटने से विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।
योजना सलाहकार डॉ. बसु सूद की ओर से इस संबंध में सभी विधायकों को पत्र जारी कर दिया गया है। विधायकों को अपनी प्राथमिकताएं 10 मार्च तक निर्धारित प्रारूप में अपलोड करनी होंगी। वे अपनी योजनाएं डाक या ई-मेल के माध्यम से भी भेज सकते हैं।
इन प्रस्तावों को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र फिलहाल स्थगित है और इसका दूसरा चरण 18 मार्च से शुरू होगा। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में विधायकों को चार नई योजनाएं प्राथमिकता में देने की अनुमति थी, जिसे इस बार घटाकर केवल एक कर दिया गया है।