फिरोजपुर (पंजाब)। गांव हजारा सिंह वाला, जिला फिरोजपुर में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैले लेप्टोस्पायरोसिस प्रकोप और एक नाबालिग बच्ची की मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गौरव अरोड़ा ने प्रधानमंत्री कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है।
डॉ. अरोड़ा ने अपनी शिकायत में फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर सहित संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, गांव में गंदे और संक्रमित पानी की आपूर्ति कई दिनों तक जारी रही, जिससे 32 लोग संक्रमित हुए, जिनमें 31 बच्चे शामिल हैं। इनमें से 19 बच्चों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि एक नाबालिग बच्ची की मौत हो गई।
शिकायत में बताया गया है कि पीने के पानी की टंकी में मृत कबूतर और चूहों की बीट पाई गई। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में लगे आरओ सिस्टम लंबे समय से खराब पड़े थे और उनके रखरखाव के अनुबंध समाप्त हो चुके थे। कई पानी की टंकियां बिना ढक्कन के खुली मिलीं, जिससे निगरानी और रखरखाव में गंभीर लापरवाही उजागर हुई।
डॉ. अरोड़ा ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा है कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन है। शिकायत में आपराधिक लापरवाही, सार्वजनिक विश्वास भंग करने और वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में असफलता के आरोप लगाए गए हैं।
PMO से की गई मांगों में शामिल हैं:
- केंद्रीय निगरानी में उच्च स्तरीय और समयबद्ध जांच
- लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई
- मृत बच्ची के परिवार और अन्य प्रभावितों को उचित मुआवजा
- राज्य में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
- सरकारी स्कूलों में आरओ सिस्टम को कार्यशील बनाने और नियमित निरीक्षण
- ग्रामीण पेयजल ढांचे का राष्ट्रीय स्तर पर ऑडिट
डॉ. अरोड़ा ने कहा कि यह मामला मासूम बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए उच्च स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि जिम्मेदारी तय हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।