Summer Express, चंडीगढ़। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कांग्रेस की कार्रवाई पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। ओडिशा और हरियाणा में समान आरोपों के बावजूद पार्टी द्वारा अलग-अलग कदम उठाए जाने से संगठन के भीतर ही असंतोष उभर रहा है।
ओडिशा में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में मतदान करने वाले तीन कांग्रेस विधायकों को पहले निलंबित किया गया और बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। वहीं हरियाणा में इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे चार विधायकों को केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर औपचारिक कार्रवाई की गई है।
हरियाणा में कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे। ऐसे में पार्टी के कई विधायक, जिन्होंने अनुशासन बनाए रखते हुए अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन किया, अब सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी में अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में पांच कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की चर्चा है, जबकि चार विधायकों के वोट निरस्त हुए। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक तौर पर चार विधायकों के खिलाफ ही कार्रवाई शुरू की है। इन विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
कई वरिष्ठ विधायकों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है और पार्टी को स्पष्ट संदेश देने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। उनका तर्क है कि ओडिशा की तरह हरियाणा में भी सख्त कार्रवाई से ही संगठन की एकजुटता और अनुशासन बनाए रखा जा सकता है।
पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि शुरुआती स्तर पर नोटिस जारी किए गए हैं और जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में अलग रुख अपनाने से कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठना तय माना जा रहा है।