Summer Express, कांगड़ा | हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी की जीवनरेखा मानी जाने वाली पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा कई वर्षों से सुचारू नहीं हो पा रही है। चुनाव के समय केंद्र सरकार और राजनेता इसकी बातें तो करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही इस परियोजना पर ध्यान नहीं दिया जाता।
रेल ट्रैक पूरी तरह तैयार है और ट्रायल सफल हो चुके हैं, लेकिन जनता अभी भी परेशान है। वर्तमान में केवल दो गाड़ियां चल रही हैं , पपरोला से कांगड़ा और बैजनाथ-पपरोला से जोगिंद्रनगर। कांगड़ा से पठानकोट की दिशा में सेवा न चलने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोग बताते हैं कि डलहौजी मार्ग के पास चक्की खड्ड पुल का पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है और 12 जनवरी को सफल ट्रायल भी किया गया था।
स्थानीय निवासी कहते हैं कि प्रदेश से भाजपा के सात सांसद होने के बावजूद केंद्रीय प्रोजेक्ट की यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। चुनाव से पहले बड़े ट्रकों और ट्रालियों के डिब्बे लाकर ट्रेन चलाने का प्रदर्शन किया गया, लेकिन जीत के बाद सेवा रोक दी गई।
जनता की मांग है कि सांसद राजीव भारद्वाज, राज्यसभा सदस्य इंदु वाला गोस्वामी और सांसद कंगना रणौत संसद में इस जनसमस्या को प्रभावी ढंग से उठाएं और पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा जल्द बहाल की जाए।
रेल सेवा केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि हिमाचल घाटी के ग्रामीण जीवन की धुरी है। विद्यार्थी, कर्मचारी और छोटे व्यापारी इस रेल पर रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निर्भर हैं। सामाजिक दृष्टि से यह लाइन गांवों को शहरों से जोड़ती रही है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर जनता तक पहुंचते रहे हैं।
पर्यटन के लिहाज से भी यह रेल सेवा बेहद महत्वपूर्ण है। कांगड़ा घाटी के धार्मिक स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण हर साल सैंकड़ों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा यदि पुनः शुरू हो जाती है, तो न केवल जनता को रोजमर्रा की सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी नई गति मिलेगी और हिमाचल की घाटियों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।