Summer Express,धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध त्रियूंड ट्रैकिंग साइट को ईको टूरिज्म सोसायटी के तहत निजी कंपनी को 86 लाख 11 हजार रुपये में आवंटित कर दिया गया है। इसके साथ ही चार चेक पोस्ट पर भी निजी कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी और पर्यटकों से निर्धारित शुल्क वसूला जाएगा।
वन विभाग धर्मशाला की ओर से ट्रैकिंग साइट के संचालन, टेंट सुविधा और चारों चेक पोस्ट पर शुल्क संग्रह का जिम्मा अब निजी फर्म को सौंपा गया है। इस संबंध में विभाग को तीन टेंडर प्राप्त हुए थे, जिन्हें शुक्रवार को खोला गया। इनमें से एक निजी कंपनी ने सबसे अधिक 86 लाख 11 हजार रुपये की बोली लगाकर टेंडर हासिल किया। यह अनुबंध 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक एक वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा।
इस दौरान स्थानीय हक-हकूक रखने वाले लोगों, धार्मिक यात्राओं और मंदिरों में जाने वाले श्रद्धालुओं को निशुल्क आवागमन की अनुमति दी जाएगी। अन्य पर्यटकों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
वन विभाग द्वारा तय नियमों के अनुसार, देशी पर्यटकों से प्रति व्यक्ति 100 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाएगा, जबकि त्रियूंड में टेंट लगाने के लिए 275 रुपये प्रति टेंट देने होंगे। विदेशी पर्यटकों के लिए यह शुल्क दोगुना निर्धारित किया गया है, जिसमें 200 रुपये प्रवेश शुल्क और 550 रुपये प्रति टेंट वसूला जाएगा।
त्रियूंड ट्रैक के लिए अब एक ही प्रवेश बिंदु की बजाय चार चेक पोस्ट स्थापित की गई हैं। इनमें धर्मकोट गलू माता मंदिर मार्ग, भागसूनाग वाटरफॉल मार्ग, हीना रेस्तरां के पास और इंद्रूनाग-चोहला की ओर बनगोटू क्षेत्र शामिल हैं। ये सभी चेक पोस्ट पहली अप्रैल से सुचारू रूप से कार्य करेंगे।
वन मंडल धर्मशाला के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि ट्रैकिंग साइट और चारों मार्गों पर चेक पोस्ट संचालन का कार्य निजी फर्म को सौंपा गया है, जो निर्धारित अवधि तक नियमों के अनुसार पर्यटकों से शुल्क वसूलेगी।