Summer express,शिमला। राज्य चुनाव आयोग ने पंचायतों के विभाजन, पुनर्गठन और परिसीमन से जुड़े मामलों में देरी और निर्देशों की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को आंशिक राहत प्रदान की है, साथ ही कई कठोर शर्तें भी लागू कर दी हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए दी गई यह राहत अंतिम मानी जाएगी।
आयोग ने नई गठित 200 पंचायतों को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके अलावा, जिन मामलों में पंचायतों को लेकर न्यायालय में विवाद चल रहा था, उन्हें भी मंजूरी दे दी गई है। आयोग ने पूरे प्रदेश में 31 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही भविष्य में उपायुक्तों को तीन महीने पहले आरक्षण रोस्टर जारी करना होगा और पंचायत सीमाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी। अपने पत्र में आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन समय पर नहीं किया। पंचायतों के गठन, पुनर्गठन, परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया 31 मार्च 2025 तक पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे बाद में 30 जून 2025 तक बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद कार्य अधूरा रहा।
इसी देरी के कारण आयोग को 17 नवंबर 2025 को आदर्श आचार संहिता लागू करते हुए पंचायतों और शहरी निकायों की सीमाएं फ्रीज करनी पड़ीं। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया पांच वर्ष की अवधि समाप्त होने से छह महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए।
इसके साथ ही राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव ड्यूटी के दौरान लापरवाही, कर्तव्यहीनता और निर्देशों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव कार्य में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी आयोग के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे और इस अवधि में वे आयोग के अनुशासनात्मक नियंत्रण में रहेंगे। चुनाव संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कदाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।