Summer express,कार्तिक ठाकुर, शिमला | हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। विपक्षी नेता बैनर और तख्तियां लेकर पहुंचे और एंट्री टैक्स नीति को वापस लेने की मांग उठाई।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि एंट्री टैक्स को लेकर हिमाचल ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में भी विरोध देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह फैसला बिना पर्याप्त विचार-विमर्श और जल्दबाजी में लिया, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के साथ किसी भी तरह की बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि एंट्री टैक्स का मुद्दा सदन के भीतर और बाहर पहले भी उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी एंट्री टैक्स देना पड़ रहा है, यहां तक कि रिश्तेदारों से मिलने जाने पर भी अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि छोटे वाहनों पर एंट्री टैक्स 40 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये तक कर दिया गया है, जबकि बड़े वाहनों पर यह शुल्क हजार रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब और हरियाणा में हिमाचल के वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने की चर्चाएं चल रही हैं, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
इसके अलावा, जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को विकास के लिए 3920 करोड़ रुपये की सहायता मिली है, जो 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में प्रदान की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस सहायता को सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं कर रही है, जबकि इससे प्रदेश के विकास को गति मिल सकती है।