Summer Express, अमेरिका । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी वायुसेना द्वारा किए गए एक बड़े और जटिल कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन की सराहना की। यह ऑपरेशन दो F-15E Strike Eagle पायलटों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाया गया था, जिसे उन्होंने “ऐतिहासिक” और “अत्यंत जोखिमपूर्ण” मिशन बताया।
ट्रंप ने कहा कि यह मिशन उन सबसे कठिन सैन्य अभियानों में से एक था, जिसमें बड़ी संख्या में संसाधनों और जवानों को तैनात किया गया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य अपने सैनिकों को सुरक्षित वापस लाना था, जिसके लिए सेना को हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।
पहले चरण में करीब 21 एयरक्राफ्ट की मदद से सर्च एंड रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। इस दौरान भारी फायरिंग और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। एक हेलीकॉप्टर पर भी गोलीबारी हुई, लेकिन टीम ने एक पायलट को ढूंढकर HH-60 Pave Hawk हेलीकॉप्टर की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
दूसरे पायलट/वेपन सिस्टम ऑफिसर को खोजने के लिए और बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया। इस चरण में कुल 155 एयरक्राफ्ट, जिनमें 64 फाइटर जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 रेस्क्यू विमान शामिल थे, तैनात किए गए। ट्रंप के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान दो कार्गो विमान रेत में फंस गए, जिन्हें सुरक्षा कारणों से नष्ट कर दिया गया ताकि कोई संवेदनशील जानकारी दुश्मन के हाथ न लगे।
बताया गया कि दूसरा क्रू मेंबर गंभीर रूप से घायल था, लेकिन उसने कठिन परिस्थितियों में भी खुद को संभालते हुए अपनी लोकेशन साझा की और संपर्क बनाए रखा। अमेरिकी सेना ने तत्परता दिखाते हुए उसे भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
ट्रंप ने इस पूरे मिशन को अमेरिकी सेना की क्षमता, समन्वय और साहस का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने यह साबित किया है कि अमेरिका अपने सैनिकों को किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं छोड़ता और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करता है।