Summer express, रोहतक | हरियाणा के रोहतक स्थित पीजीआई में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां भिवानी जिले के जुई कलां निवासी 37 वर्षीय विजेंद्र ने अपनी मृत्यु के बाद भी आठ लोगों को नई जिंदगी दे दी। गंभीर सिर की चोट के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
परिवार ने कठिन समय में भी साहस दिखाते हुए विजेंद्र के अंगदान का निर्णय लिया। उनके दो कॉर्निया, हृदय, लिवर, फेफड़े और दोनों किडनी दान की गईं। इन अंगों को सुरक्षित तरीके से जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिसके माध्यम से अंगों को रोहतक से गुरुग्राम और दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में भेजा गया।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार, अंगों को तीन अलग-अलग एंबुलेंस के जरिए रवाना किया गया। सबसे पहले हृदय को दिल्ली भेजा गया, जबकि अन्य अंगों को भी समयबद्ध तरीके से अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। इस दौरान पुलिस की विशेष व्यवस्था रही, जिसमें प्रत्येक एंबुलेंस के साथ सुरक्षा वाहनों का काफिला मौजूद था, ताकि अंगों को बिना किसी देरी के गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
विजेंद्र के पिता राजबीर ने बताया कि बेटे को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, लेकिन सात दिन के इलाज के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों की सलाह और सोटो टीम की समझाइश के बाद परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि बेटे को खोने का दुख जरूर है, लेकिन यह संतोष भी है कि उसके अंग किसी और के काम आएंगे।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह पीजीआई में तीसरा मल्टी ऑर्गन डोनेशन है और पहली बार सभी प्रमुख अंग सफलतापूर्वक दान किए गए हैं। वहीं, समालखा विधायक मनमोहन सिंह भड़ाना ने परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
यह घटना न केवल मानवता का संदेश देती है, बल्कि समाज को अंगदान के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा भी देती है।