Summer express/ पलवल-:हरियाणा के पलवल में ट्रैफिक नियमों की अवहेलना पर लगाम कसने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन लगाम’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस कार्रवाई के बीच आमजन ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पलवल पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में ब्लैक फिल्म लगी गाड़ियां, मॉडिफाइड वाहनों, पटाखा साइलेंसर वाली बुलेट, बिना नंबर प्लेट के वाहन और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यह अभियान पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
डीएसपी मनोज वर्मा के अनुसार, ‘ऑपरेशन लगाम’ के तहत पांच विशेष टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों ने पिछले 22 दिनों में व्यापक कार्रवाई करते हुए हजारों चालान किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, शराब पीकर वाहन चलाने के 508, ब्लैक फिल्म के 1101, रेड-ब्लू लाइट के 16, मॉडिफाइड साइलेंसर बुलेट के 88, बिना नंबर प्लेट के 1157 और प्रेशर हॉर्न के 114 चालान किए गए हैं। कुल मिलाकर अब तक 9106 चालान किए जा चुके हैं, जिन पर करीब 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।इसके साथ ही पुलिस ने “ना रील में गुंडागर्दी, ना रोड पर मनमानी” अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट या नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, आम लोगों में इस अभियान को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि ट्रैफिक नियम केवल आम जनता पर ही लागू होते हैं, जबकि कई पुलिसकर्मी खुद नियमों का उल्लंघन करते नजर आते हैं। पुलिस वाहनों पर स्टिकर, डैशबोर्ड पर पुलिस कैप रखकर रौब दिखाना और अन्य अनियमितताएं आम बात हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
इस पर डीएसपी मनोज वर्मा ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति—चाहे आम नागरिक हो या पुलिसकर्मी—यदि नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वाहन पर अवैध शब्द लिखना या डैशबोर्ड पर पुलिस कैप रखकर चलना नियमों के खिलाफ है।अब देखना होगा कि यह अभियान जमीन पर कितनी निष्पक्षता से लागू होता है और क्या वाकई सभी पर समान रूप से कार्रवाई होती है।