Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा में शहरी निकाय कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है। अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर के करीब 30 हजार सफाई कर्मचारी और दमकल कर्मी सामूहिक हड़ताल पर उतर आए हैं। सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद यूनियन ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक काम पर वापसी नहीं होगी।
बीते दिन नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और शहरी निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा के बीच लंबी वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। विभाग की ओर से स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न करने की अपील की गई, वहीं कर्मचारी संगठन अपनी प्रमुख मांगों पर अडिग रहे।
यूनियन की मुख्य मांगों में सफाई और सीवर कार्य में ठेका प्रथा समाप्त करना, ठेका कर्मचारियों को विभाग के रोल पर लेकर न्यूनतम 30 हजार रुपये वेतन देना, लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करना और फायर कर्मियों की लंबित मांगों को लागू करना शामिल है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि 2 मई तक कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया जाएगा।
हड़ताल के ऐलान के बाद सरकार भी सख्त रुख में आ गई है। शहरी निकाय विभाग ने सभी नगर निगमों और पालिकाओं को निर्देश जारी कर हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की सैलरी काटने और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो।
इधर, दमकल विभाग के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं और प्रदेशभर के फायर स्टेशनों पर पांच दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है।
हड़ताल के चलते शहरों में कूड़ा उठान प्रभावित होने की आशंका है। भीषण गर्मी के बीच यदि सफाई व्यवस्था बाधित हुई तो आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।