Summer express/मंडी , धर्मवीर -:16 मई 2026 यानी शनिवार की सांज आते ही छोटी काशी मंडी गमगीन हो गई है। आज इस शहर से संबध रखने वाले व हिमाचल के मशहूर साहित्यकार कृष्ण कुमार नूतन इस संसार को अलविदा कह गए हैं। हिंदी फिल्म गीत गाया पत्थरों ने गाने से चर्चित हुए कृष्ण कुमार ने 97 साल की उम्र में चंद्रलोक गली में स्थित अपने निवास स्थान में अंतिम सांस ली। वे काफी वयोवृद्ध हो चुके थे और बढ़ती उम्र संबधी परेशानियों से बड़े लंबे दौर से गुजर रहे थे। दो दिन पहले भी परिजन उन्हें अस्पताल लेकर गए थे और उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने उन्हें उपचार देने के बजाय उनका खयाल रखने की ही सलाह दी थी। पिछले माह भी उनकी तबीयब नासाज हो चली थी, जिस कारण वे एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहे।
केके नूतन मंडी के पहले साहित्यकार थे जिनकी पुस्तक 1948 में प्रकाशित हो चुकी थी। केके नूतन के नाम से मशहूर नूतन का इतिहास साक्षी है पुस्तक पर प्रदेश सरकार के भाषा संस्कृति विभाग की ओर से डॉ यशवंत सिंह परमार राज्य पुरस्कार प्रदान किया गया। नूतन ने बीस के करीब पुस्तकें लिखी, जिनमें अधिकांश उपन्यास हैं। मन एक प्यासी मछली, मृदुला, संस्कार, यादगार, परिप्रभा, सेना या आजादी, देवभूमि, रसकलश, व्याकुल हृदय, मानवाधिकार इत्यादि रचनाएं खूब प्रचलित हैं। इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी रानी खैरगढ़ी, स्वामी कृष्णा नंद और भाई हिरदा राम की जीवनी भी उन्होंने प्रकाशित की थी। केके नूतन साहित्यकार के अलावा क्रांतिकारी कर्मचारी नेता रहे और उन्होने कई आन्दोलनों का नेतृत्व भी किया है। इतिहास पर उनकी खासी पकड़ थी। उनकी साहित्यिक सेवाओं को देखते हुए हेमकांत मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया है। इसके अलावा अन्य दर्जनों संस्थाए भी उन्हें सम्माानित कर चुकी हैं। उनके संसार से जाने के बाद साहित्य जगत को अपूरणीय कमी खलेगी। 17 मई को सुबह 10 बजे हनुमान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।