Summer express, राकेश कुमार शर्मा , करनाल | करनाल समेत हरियाणा के कई जिलों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हो गया है। दोपहर के समय सड़कें और बाजार लगभग सूने दिखाई देते हैं, जबकि लोग जरूरी काम भी सुबह और शाम के समय ही निपटाने को मजबूर हैं। बढ़ती गर्मी के बीच ठंडे पानी की तलाश लोगों को एक बार फिर मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों की ओर ले जा रही है।
दोपहर में बाजारों पर गर्मी का पहरा:
चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं ने शहर की रफ्तार को धीमा कर दिया है। दोपहर के समय बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम हो गई है। लोग घरों और दफ्तरों में रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। गर्मी का असर कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है, जिससे दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है।
मिट्टी के बर्तनों की ओर लौट रहे लोग :
भीषण गर्मी के बीच घड़े, मटके और सुराही की मांग में तेजी देखने को मिल रही है। लोग प्राकृतिक रूप से ठंडा पानी पीने के लिए मिट्टी के बर्तनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। मिट्टी के बर्तन बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक दिन की बजाय सुबह और शाम को खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। उनका मानना है कि मिट्टी के बर्तनों का पानी न केवल ठंडक देता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।
रोजगार की मजबूरी, धूप में भी जारी संघर्ष :
तेज गर्मी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनकी रोजी-रोटी सड़क और खुले आसमान के नीचे चलती है। रेहड़ी-पटरी संचालकों, दिहाड़ी मजदूरों और निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों को तपती धूप में काम करना पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए वे सिर पर कपड़ा बांधने, बार-बार पानी पीने और छांव का सहारा लेने को मजबूर हैं।
ग्राहक कम, कारोबार पर भी असर :
बढ़ते तापमान का असर छोटे कारोबारियों पर भी दिखाई दे रहा है। दर्जी और अन्य दुकानदारों का कहना है कि दोपहर में ग्राहक लगभग न के बराबर आते हैं। गर्मी से बचने के लिए वे छतरी और अन्य उपायों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन बाजार में कम भीड़ होने से काम प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि सबसे अधिक कठिनाई उन लोगों को हो रही है जिन्हें खुले में मजदूरी करनी पड़ रही है।