Summer express, नई दिल्ली | तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने संसदीय पद समेत संगठन के सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया है। हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाली वह दूसरी राज्यसभा सांसद बन गई हैं, जिससे टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतोष की चर्चाओं को और बल मिला है।
सूत्रों के अनुसार सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने असम में टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष पद और अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारियों से भी खुद को अलग कर लिया है।
सुष्मिता देव वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उस समय उन्होंने पार्टी के साथ नए राजनीतिक सफर की शुरुआत करने की बात कही थी। हालांकि अब उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
इस्तीफे के बाद सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि वह जल्द भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम सकती हैं, हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सुष्मिता देव असम की वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय संतोष मोहन देव की पुत्री हैं। वह कांग्रेस की महिला इकाई ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे भी पार्टी छोड़ने का एलान कर चुके हैं। उन्होंने टीएमसी और पश्चिम बंगाल सरकार की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफों और आंतरिक असंतोष की खबरों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वरिष्ठ नेताओं का पार्टी से दूरी बनाना टीएमसी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।