गुरशरण सिंह | मोहाली
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की सोशल मीडिया गतिविधियां इन दिनों प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जून 2025 के बाद से चन्नी की व्यक्तिगत सोशल मीडिया पोस्टों, पोस्टरों व प्रचार सामग्री में कांग्रेस का चुनाव चिह्न ‘हाथ’ दिखाई नहीं दे रहा है।
हालांकि, इन पोस्टों में चन्नी खुद को कांग्रेस से अलग नहीं बताते और वह पार्टी की बैठकों, विरोध प्रदर्शनों तथा अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय नजर आते रहे हैं। चन्नी की व्यक्तिगत क्रिएटिव सामग्री में पार्टी के चुनाव चिह्न की मौजूदगी कम या नदारद है। इनमें चन्नी की तस्वीर, उनका नाम और पंजाब से जुड़े राजनीतिक व जनहित के मुद्दे प्रमुखता से रखे जाते हैं। युवाओं, बेरोजगारी, किसानों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनके संदेश तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो भी साझा किए जाते हैं। चन्नी समर्थक सोशल मीडिया खातों से भी उनकी गतिविधियों को केंद्र में रखकर रील्स और वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं।
‘हाथ’ चुनाव चिह्न की कथित गैर-मौजूदगी की चर्चा ऐसे समय तेज हुई, जब पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद और 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि, चन्नी या कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि व्यक्तिगत पोस्टों में ‘हाथ’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करना किसी रणनीति का हिस्सा है या केवल डिजाइन और प्रचार सामग्री की शैली में बदलाव है।
{प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान: पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी अंदरूनी मतभेदों की चर्चा होती रही है। चन्नी समर्थक नेताओं का एक वर्ग उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने या 2027 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, राजा वड़िंग के समर्थक मौजूदा संगठनात्मक नेतृत्व के पक्ष में हैं। चन्नी के आवास पर वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों की बैठकों के बाद भी इन चर्चाओं को बल मिला है।
{अलग मंच की अटकलें : चन्नी की अलग डिजिटल पहचान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भले तेज हों, लेकिन उन्होंने कांग्रेस छोड़ने या नया राजनीतिक मंच बनाने की कोई घोषणा नहीं की है।
क्या लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में मिली हार के कारण कांग्रेस हाईकमान चन्नी गुट से नाराज हुआ?
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 19 जून 2025 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसी दिन लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान हुआ, जिसमें बाद में आम आदमी पार्टी के संजीव अरोड़ा ने कांग्रेस उम्मीदवार भारत भूषण आशु को 10,637 मतों से हरा दिया। चुनावी हार के बाद पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और नेताओं के बीच तालमेल की कमी पर सवाल उठे। कुछ राजनीतिक चर्चाओं में इस हार को चन्नी गुट के लिए झटका माना गया, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने आधिकारिक रूप से चन्नी या उनके समर्थक नेताओं को हार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। इसके बजाय भारत भूषण आशु सहित तीन प्रदेश पदाधिकारियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दिया, जिन्हें पार्टी नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि क्या कांग्रेस की इस हार के लिए चन्नी गुट को जिम्मेदार माना गया था। क्या लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में मिली हार के कारण ही कांग्रेस हाईकमान चन्नी गुट से नाराज हुआ? 12 जुलाई 2025 को चन्नी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई कि चन्नी गुट ने हाईकमान के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने और नाराजगी दूर करने की कोशिशें तेज की। हालांकि, इन मुलाकातों और लुधियाना पश्चिम की हार के बीच सीधे संबंध को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।