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बड़े राजनीतिक मंच के रूप में उभर रहा छपार मेला

डॉ. कुलदीप सिंह भुल्लर
समर न्यूज | अहमदगढ़

लुधियाना का ऐतिहासिक छपार मेला इस वर्ष अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान से आगे बढ़कर 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक मंच के रूप में उभर रहा है। भाद्रपद चौदस के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह मेला राजनीतिक दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बन गया है। राजनीतिक हलचल 26 सितंबर को अपने चरम पर होगी, जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल मेला परिसर में अपनी-अपनी रैलियों और सम्मेलनों का आयोजन करेंगे।
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यहां जुटने वाली स्वतःस्फूर्त भीड़ है। प्रायोजित रैलियों के विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता बिना किसी पार्टी सहायता के स्वयं भारी संख्या में पहुंचते हैं। यही कारण है कि सभी दल मालवा बेल्ट में जनता की नब्ज भांपने के लिए इस स्व-एकत्रित जनसमूह को साधने में जुटे हैं।
विभिन्न दलों का सियासी गणित: सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) अपने शासनकाल के कार्यों और उपलब्धियों के दम पर ग्रामीण समर्थन को मजबूत करने और 2027 में सत्ता में वापसी के प्रयास में है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ बन रहे सत्ता-विरोधी (एंटी-इन्कमबेंसी) माहौल को अपने पक्ष में भुनाने की तैयारी कर रहा है। शिरोमणि अकाली दल अपने पारंपरिक पंथक और ग्रामीण जनाधार को पुनः हासिल करने के लिए संघर्षरत है। शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) बंदी सिंहों की रिहाई, पंजाब के नदी जल अधिकार और राज्य की स्वायत्तता जैसे कोर क्षेत्रीय मुद्दों को उठाकर स्थापित दलों को चुनौती देने की योजना बना रहा है। 26 सितंबर को होने वाले सम्मेलनों में जनता की प्रतिक्रिया ही यह पहला स्पष्ट संकेत देगी कि 2027 के आगामी चुनावों में चुनावी हवा किस तरफ रुख कर रही है।

{छपार मेले का इतिहास
लुधियाना जिले के छपार गांव में लगने वाला छपार मेला पंजाब के पुराने और प्रसिद्ध मेलों में शामिल है। इसका आयोजन हर वर्ष सितंबर में श्री गूगा पीर की स्मृति में किया जाता है। लोक मान्यता के अनुसार गूगा पीर को सांपों से रक्षा करने वाला लोकदेवता माना जाता है। मेले की शुरुआत धार्मिक आस्था से हुई, लेकिन समय के साथ यह ग्रामीण पंजाब की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ लोकगीत, कुश्ती, झूले और पारंपरिक मनोरंजन भी आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
{राजनीतिक महत्व
राजनीतिक महत्व भी इस मेले को खास बनाता है। पंजाब के प्रमुख राजनीतिक दल और नेता अक्सर मेले में पहुंचकर लोगों से संपर्क करते हैं। ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने और राजनीतिक संदेश देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। खासकर चुनावी वर्षों में नेताओं की भागीदारी बढ़ जाती है। हालांकि मेले का मूल स्वर धार्मिक और सांस्कृतिक है, लेकिन पंजाब की राजनीति में इसकी जनसंपर्क और राजनीतिक गतिविधियों के कारण अलग पहचान बन गई है।

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