समर न्यूज। पटियाला
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने दम पर राज्यव्यापी मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करने की है। शिरोमणि अकाली दल के साथ लंबे समय तक गठबंधन में रहने के कारण भाजपा का चुनावी प्रभाव मुख्य रूप से सीमित क्षेत्रों तक रहा है।
अब पार्टी ने सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू की है। ऐसे में उसके सामने शहरी क्षेत्रों से आगे बढ़कर ग्रामीण और मालवा क्षेत्र में संगठन तथा जनसंपर्क मजबूत करने की चुनौती है।
भाजपा ने इस चुनौती से निपटने के लिए बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने पर जोर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने सितंबर के अंत तक बूथ समितियों को मजबूत करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का लक्ष्य रखा है। नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में जिला स्तर पर बैठकों और चुनावी रणनीति पर लगातार चर्चा की जा रही है। ढिल्लों की नियुक्ति को मालवा और ग्रामीण पंजाब में पार्टी की पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
पार्टी ने नशे के मुद्दे को व्यापक जनसंपर्क अभियान में बदलने की रणनीति अपनाई है। 18 से 30 सितंबर तक चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ निकाली जा रही हैं, जो करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेंगी।
भाजपा का कहना है कि अभियान का उद्देश्य नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना है। विपक्षी दल इसे चुनावी अभियान से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
{ग्रामीण पंजाब पर नजर
भाजपा केंद्रीय योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास एजेंडे को भी गांवों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं को बूथ स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाने और केंद्र की योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सिख समाज और स्थानीय प्रभावशाली नेताओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश भी संगठन की रणनीति का हिस्सा है।
{गठबंधन से अलग पहचान
अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर समय-समय पर चर्चा सामने आती रही है, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। इससे पार्टी के सामने अपने संगठन और उम्मीदवारों का ऐसा ढांचा तैयार करने की आवश्यकता बढ़ गई है, जो पूरे राज्य में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सके।