मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर हलफनामा
दाखिल करने काे कहा
एजेंसी | नई दिल्ली
पंजाब में मादक पदार्थों के कारोबार और उससे जुड़े व्यापक नेटवर्क के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को भी पक्षकार बना लिया है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों को तत्काल सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने और मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर पांच दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट का यह कदम इस मामले को केवल पंजाब तक सीमित न मानते हुए पड़ोसी राज्यों से जुड़े संभावित नेटवर्क और इसके व्यापक प्रभाव की जांच की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से बर्खास्त पुलिस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल को पकड़ने के लिए अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है। हुंदल को मामले में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि राज्य सरकार और उसकी जांच एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार करने के लिए क्या कदम उठाए हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही है। सीमापार से मादक पदार्थों की तस्करी, स्थानीय तस्करी नेटवर्क और युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर राज्य में लगातार कार्रवाई होती रही है। पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां समय-समय पर बड़ी मात्रा में हेरोइन और अन्य मादक पदार्थ बरामद करने के साथ तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करती रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से संकेत मिलता है कि अदालत अब इस समस्या को व्यापक अंतरराज्यीय दृष्टिकोण से देख रही है। पंजाब की भौगोलिक स्थिति के कारण नशे की तस्करी का असर पड़ोसी राज्यों तक पहुंचने की आशंका रहती है। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को पक्षकार बनाए जाने से अब इन राज्यों से भी यह जानकारी मांगी जाएगी कि वे मादक पदार्थों की तस्करी और इसके नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।
राजजीत सिंह हुंदल की तलाश अहम
अदालत ने तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों को आपस में समन्वय कर बैठक करने को कहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में चल रही कार्रवाई और रणनीति को एक साथ लाना है। पांच दिन में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश के कारण राज्यों को अपने-अपने स्तर पर की गई कार्रवाई, जांच और भविष्य की रणनीति का विस्तृत ब्योरा तैयार करना होगा। मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल की भूमिका भी जांच के केंद्र में रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब से उनकी गिरफ्तारी के प्रयासों की जानकारी मांगी है। उनके फरार होने और भगोड़ा घोषित किए जाने के कारण जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर भी सवाल उठते रहे हैं। अब राज्य को अदालत के समक्ष यह बताना होगा कि उन्हें पकड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
तीनों राज्यों के समन्वय की परीक्षा
अदालत के निर्देश के बाद पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच मादक पदार्थों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर जोर बढ़ सकता है। नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल गिरफ्तारी और बरामदगी के बजाय तस्करी के स्रोत, वित्तीय लेनदेन और अंतरराज्यीय संपर्कों की पहचान भी महत्वपूर्ण होगी। पांच दिन में दाखिल होने वाले हलफनामों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि तीनों राज्य इस चुनौती से निपटने के लिए अब तक क्या कर रहे हैं और आगे किस संयुक्त रणनीति पर काम करेंगे।