summer express, नई दिल्ली। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हिमाचलियों से अपने मूल राज्य, संस्कृति और पहचान से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी हिमाचली रोजगार, कारोबार और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने के साथ-साथ हिमाचल की विशिष्ट पहचान को देशभर में मजबूत करने में भी योगदान दें।
शनिवार को शाह ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में हिमाचल मंडी जन कल्याण सभा की ओर से आयोजित सायर उत्सव में जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल से बाहर रह रहे लोगों और सामाजिक संस्थाओं ने प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्य के लोगों की मदद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 2.5 लाख लोग हिमाचल लौटे थे। प्रवासी हिमाचलियों और संस्थाओं ने दिल्ली में लोगों के ठहरने व भोजन की व्यवस्था करने के साथ उन्हें उनके मूल गांवों तक पहुंचाने में भी सहयोग किया।
जयराम ठाकुर ने पिछले वर्ष मानसून के दौरान हिमाचल में आई बाढ़ और आपदा के समय संस्थाओं की ओर से किए गए राहत कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के दूरदराज इलाकों में कई राहत शिविर लगाए गए और प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने राज्य के ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए भी संस्था की प्रशंसा की और भविष्य में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रवासी हिमाचलियों से अपनी संस्कृति और सभ्यता को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में हिमाचल के एंबेसेडर की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में प्रवासी हिमाचलियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से उपलब्धियां हासिल की हैं। अब वे अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के जरिए हिमाचल के विकास में भी योगदान दे सकते हैं। इस दौरान उन्होंने सभा को अपनी ऐच्छिक निधि से 51 हजार रुपये देने की घोषणा की।
कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से इस संस्था से जुड़े हुए हैं और इस अवधि में सभा ने विभिन्न क्षेत्रों में लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्यत्व का दर्जा मिलने के बाद हिमाचल ने देश के मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
सभा के अध्यक्ष केआर वर्मा ने महानगरों में रहने वाले प्रवासी हिमाचलियों के बच्चों को मेडिकल कॉलेज और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में हिमाचल के विद्यार्थियों के समान अवसर देने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रवासी हिमाचलियों के बच्चों को बाहरी राज्यों के विद्यार्थियों की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने ऐसे विद्यार्थियों के लिए पांच प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का अनुरोध किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले हिमाचलियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा हिमाचली संस्कृति पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।