Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण और अमानवीय व्यवहार का शिकार हुए 15 वर्षीय किशोर को विशेष मामले के रूप में 10 लाख रुपये का मुआवजा मंजूर किया गया है। आयोग की सिफारिश पर हरियाणा सरकार ने 16 जून 2026 को यह राशि स्वीकृत की। उल्लेखनीय है कि हरियाणा विक्टिम कम्पेंसेशन स्कीम-2020 के तहत ऐसे मामलों में अधिकतम दो लाख रुपये के मुआवजे का ही प्रावधान है।
आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच कराई। जांच में सामने आया कि बिहार के किशनगंज निवासी 15 वर्षीय बालक को रोजगार का झांसा देकर बहादुरगढ़ स्थित एक डेयरी फार्म पर लाया गया, जहां उससे दो महीने से अधिक समय तक बंधुआ मजदूरी कराई गई। इस दौरान उससे चारा काटने वाली मशीन सहित कई जोखिम भरे कार्य करवाए गए।
जांच के अनुसार, काम के दौरान चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आने से बालक का बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। आरोप है कि हादसे के बाद नियोक्ता ने उसका उपचार कराने के बजाय घायल अवस्था में उसे सुनसान स्थान पर छोड़ दिया।
इस मामले में बहादुरगढ़ जीआरपी थाने में भारतीय न्याय संहिता-2023 और किशोर न्याय अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जांच पूरी कर आरोप-पत्र भी अदालत में दाखिल कर दिया है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, बंधुआ मजदूरी तथा संविधान के अनुच्छेद-21 और अनुच्छेद-23 का हनन माना। सुनवाई के दौरान आयोग ने बालक की स्थायी विकलांगता और उसके पुनर्वास की आवश्यकता को देखते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-18 के तहत 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की अनुशंसा की।
आयोग ने मामले की प्रभावी जांच के लिए पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत को प्रशंसा-पत्र जारी किया है। वहीं, जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।