Summer express, चानौत। गांव चानौत में पेयजल संकट को लेकर चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। सरकार की ओर से लगातार वार्ता और समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग हैं। शाम मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से धरना समिति को एक बार फिर बातचीत का न्योता भेजा गया। एसपी के माध्यम से पहुंचे इस संदेश के बावजूद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
इससे पहले वीरवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री और धरना समिति के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक हुई थी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव के लिए खरकड़ी हेड से 10 इंच की अलग पेयजल पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, धरना स्थल पर आयोजित महापंचायत में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
धरना समिति के सदस्य अनूप चानौत ने कहा कि जब तक गांव को भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से सीधा टी-कनेक्शन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अलग पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव ग्रामीणों को स्वीकार नहीं है।
इस बीच आंदोलन को समर्थन देने के लिए पंजाब, सिरसा और फतेहाबाद से ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ संगठन से जुड़े किसानों का बड़ा जत्था चानौत पहुंचा। प्रशासन ने बरवाला रोड स्थित सिंघवा बस स्टैंड के पास भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग के जरिए किसानों को रोकने का प्रयास किया। इससे नाराज किसानों ने मौके पर ही सड़क पर धरना शुरू कर दिया।
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ किसानों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस अधिकारियों और किसान नेताओं सतबीर पहलवान, दिलबाग हुड्डा तथा मनदीप के बीच तीखी नोकझोंक हुई। किसानों के सख्त रुख को देखते हुए प्रशासन को अंततः बैरिकेड हटाने पड़े और जत्थे को धरना स्थल तक जाने की अनुमति देनी पड़ी।
आंदोलन को लंबे समय तक संगठित और प्रभावी ढंग से चलाने के लिए ग्रामीणों ने तीन समितियों का गठन किया है। इनमें 21 सदस्यीय मुख्य समिति सरकार और प्रशासन के साथ वार्ता एवं समन्वय का कार्य करेगी, जबकि 11-11 सदस्यों वाली दो अन्य समितियां धरना स्थल की व्यवस्थाओं और आगामी रणनीति को संभालेंगी। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।