Summer express, सराज। समुद्र तल से करीब छह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित सराज क्षेत्र के आराध्य देव केओली नारायण का नव निर्मित भव्य मंदिर अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। करीब छह से सात माह के अथक परिश्रम, जनसहयोग और श्रद्धालुओं की आस्था से निर्मित इस मंदिर की प्रतिष्ठा का दो दिवसीय धार्मिक समारोह केओली में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान आज मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न किए जा रहे हैं, जबकि रविवार को विशाल सामूहिक धाम का आयोजन होगा।
केओली, बगलियारा, बेउटीनाल, बुंगादोघरी, बुनालीधार सहित समूचे सराज क्षेत्र के लोगों के सहयोग से लाखों रुपये की लागत से इस भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर निर्माण में किसी भी प्रकार की सरकारी धनराशि का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि श्रद्धालुओं के आर्थिक सहयोग और श्रमदान से इस धार्मिक धरोहर को नया स्वरूप दिया गया है।
आज सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और हवन-यज्ञ का आयोजन शुरू हो चुका है। देवता के पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की जा रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह सवा नौ बजे से 11 बजे तक मूल मूर्ति की स्थापना की प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। इसके बाद दोपहर में देव केओली नारायण को विधिवत नव निर्मित मंदिर में विराजमान कराया जाएगा, जबकि शाम के समय गूर द्वारा मंदिर की परिक्रमा और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष आई प्राकृतिक आपदा के दौरान देव केओली नारायण के प्राचीन मंदिर को आंशिक नुकसान पहुंचा था। मंदिर अपने स्थान से हिल गया था और उसके ऊपर से मलबा भी गुजर गया था। हालांकि, मंदिर में स्थापित भगवान परशुराम की प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित रही थी। इसके बाद करीब 60 वर्ष बाद मंदिर का पुनर्निर्माण करने का निर्णय लिया गया।
देवता के गूर लाल सिंह ठाकुर ने बताया कि मंदिर निर्माण में सराज क्षेत्र और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं ने निस्वार्थ भाव से सहयोग किया है। वहीं, देवता कमेटी के सदस्य खजान सिंह ठाकुर ने बताया कि रविवार को आयोजित होने वाले विशाल सामूहिक धाम में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके लिए सराज क्षेत्र के करीब 70 देथलों को भी निमंत्रण भेजा गया है।
नव निर्मित मंदिर हिमाचली काष्ठशिल्प का बेजोड़ नमूना है। देवदार की लकड़ी से निर्मित इस मंदिर के मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा उकेरी गई है, जबकि प्रवेश द्वार के दोनों ओर भगवान विष्णु और मां सरस्वती की भव्य कलाकृतियां इसकी सुंदरता को और बढ़ा रही हैं।