शिमला, 30 जून-: मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हमीरपुर जिले के नेरी और जाहू में स्थापित किए जा रहे देश के पहले स्वदेशी बायोचार संयंत्रों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य में रोजगार सृजन, वन संसाधनों के सतत प्रबंधन और कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से यह परियोजना संचालित की जा रही है। इसके तहत चीड़ की पत्तियां, लैंटाना, बांस तथा अन्य पौध-आधारित बायोमास से बायोचार तैयार किया जाएगा। बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है तथा बेहतर गुणवत्ता पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।उन्होंने कहा कि परियोजना की 10 वर्ष की अवधि में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट प्राप्त होने का अनुमान है, जिससे हिमाचल प्रदेश की हरित विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 50 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। इस कार्यक्रम से लगभग 13.5 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के प्रबंधन में योगदान मिलने की संभावना है। साथ ही मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि और कार्बन अवशोषण को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के संचालन में जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एवं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम ने हिमाचल सरकार के जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से जलवायु संकट से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।बैठक में पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और प्रोक्लाइम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी केविन कुमार कंदासेमी भी उपस्थित रहे।