Summer express/धर्मशाला, राहुल -:आधुनिक समय में अपराधों की वैज्ञानिक जांच में फॉरेंसिक साइंस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि वास्तविक मामलों पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। इसी दिशा में धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला देश-विदेश के विद्यार्थियों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभर रही है। यहां विभिन्न राज्यों और विदेशों से आने वाले छात्र इंटर्नशिप के दौरान अपराध जांच की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली सहित देश के कई राज्यों के विद्यार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही नेपाल, अफ्रीकी देशों तथा अन्य विदेशी छात्रों की भी यहां लगातार भागीदारी बढ़ रही है। प्रयोगशाला में विद्यार्थियों को वास्तविक मामलों के आधार पर साक्ष्य संग्रह, संरक्षण, परीक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया जाता है।हिमाचल प्रदेश फॉरेंसिक सेवा निदेशालय की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में इंटर्नशिप एक अनिवार्य शैक्षणिक हिस्सा है। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को चेन ऑफ कस्टडी, अपराध स्थल से साक्ष्य संग्रह, वैज्ञानिक परीक्षण, प्रयोगशाला विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनकी पेशेवर दक्षता में वृद्धि होती है।उन्होंने बताया कि इस वर्ष समर इंटर्नशिप के दौरान अब तक 75 से अधिक विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। प्रशिक्षण की अवधि 15 से 30 दिनों के बीच निर्धारित की जाती है, ताकि विद्यार्थियों को पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव मिल सके। इस प्रशिक्षण का लाभ छात्रों को भविष्य में सरकारी और निजी फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, जांच एजेंसियों तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थानों में रोजगार प्राप्त करने में मिलता है। कई पूर्व प्रशिक्षु वर्तमान में विभिन्न सरकारी विभागों और भारत सरकार की फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। धर्मशाला की यह प्रयोगशाला अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत करती जा रही है।