मोनिका रावत | चंडीगढ़
शहर में नशे के खिलाफ पुलिस और प्रशासन की कड़ा कदम उठाना होगा। शहर में नशे के खिलाफ अभियान चलाए चंडीगढ़ पुलिस। यदि एक माह में शहर नशा मुक्त न हुआ तो गृह मंत्री अमित शाह के सामने यह मामला उठेगा। भाजपा के महामंत्री एवं कृत्वनिष्ठ संस्था के संस्थापक संजीव राणा ने शहर में नशे के खिलाफ जन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
संजीव राणा ने कहा कि चंडीगढ़ में भी नशा एक बड़ा मुद्दा है। इसके लिए जमीनी लड़ाई लड़नी होगी। इसके लिए राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा। शहर की कालोनियों और गांवों में उन लोगों की पहचान करनी होगी जो नशा बेच रहे है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नगर निगम सदन की बैठक में भी नशे का मुद्दा उठाया था। समर न्यूज से बातचीत में संजीव राणा ने नशे पर गंभीर चिंता जताई।
प्रश्न: आप वर्षों से राष्ट्र और समाज से जुड़े अभियानों का नेतृत्व करते रहे हैं। अब आपने नशे के खिलाफ इतना बड़ा अभियान क्यों शुरू किया?
संजीव राणा : मेरा जीवन हमेशा “राष्ट्र प्रथम” के विचार से प्रेरित रहा है। समाज और देश के लिए कार्य करना मेरी प्राथमिकता रही है। ‘एक ईंट शहीद के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 3.60 लाख लोगों को जोड़कर शहीदों की स्मृति में स्मारकों के निर्माण का कार्य किया गया। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र के वीर सपूतों के प्रति सम्मान का प्रतीक था। इन कार्यों की सराहना भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत तथा देश के कई राज्यपालों ने भी की। आज मुझे महसूस हो रहा है कि जिस प्रकार देश के युवाओं को नशे की ओर धकेला जा रहा है, उसके खिलाफ भी उसी समर्पण और दृढ़ता से खड़ा होना समय की आवश्यकता है।
प्रश्न: आप नशे की समस्या को कितना गंभीर मानते हैं?
संजीव राणा: मेरी दृष्टि में यह केवल नशा नहीं है, बल्कि चलता-फिरता आतंक है। आतंकवाद देश पर बाहर से हमला करता है, जबकि नशा हमारे घरों के भीतर घुसकर हमारी युवा पीढ़ी को खत्म करता है। यह हमारे परिवारों, समाज और राष्ट्र की जड़ों को कमजोर कर रहा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि जहां युवा बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं, जहां बच्चे खेलते हैं, पढ़ते हैं और अपना भविष्य बनाते हैं, वहीं नशे का जाल फैलाया जा रहा है। यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो इसके परिणाम बहुत भयावह होंगे।
प्रश्न: आपने चंडीगढ़ को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उसका कारण क्या है?
संजीव राणा: चंडीगढ़ आज एक बारूद के ढेर पर बैठा हुआ शहर बनता जा रहा है। यदि नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में इसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं। यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है। इसलिए इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रश्न: चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन से आपकी क्या अपेक्षा है?
संजीव राणा: मैं चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन से आग्रह करता हूं कि अगले एक महीने के भीतर नशा तस्करों के खिलाफ व्यापक, लगातार और परिणाम देने वाला अभियान चलाया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो मैं मजबूर होकर आमरण अनशन पर बैठूंगा। मेरा उद्देश्य किसी से टकराव नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाना है। आवश्यकता पड़ने पर मैं इस पूरे विषय को माननीय केंद्रीय गृहमंत्री के समक्ष भी रखूंगा, ताकि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
प्रश्न: इस अभियान में जनता की क्या भूमिका होनी चाहिए?
संजीव राणा: यह लड़ाई केवल पुलिस, प्रशासन या किसी एक संगठन की नहीं है। हर माता-पिता, हर शिक्षक, हर खिलाड़ी, हर सामाजिक संगठन और हर जागरूक नागरिक को आगे आना होगा। यदि किसी क्षेत्र में नशा बिक रहा है, तो उसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंचाना भी समाज की जिम्मेदारी है। हमें अपने बच्चों पर ध्यान देना होगा, उन्हें खेल, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करना होगा। मेरा विश्वास है कि जब समाज और प्रशासन एक साथ खड़े होंगे, तभी नशे जैसी इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सकेगा। मेरा संकल्प स्पष्ट है—हम अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करेंगे और चंडीगढ़ को नशे की गिरफ्त में नहीं जाने देंगे।