जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में बन रही एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी का करीब 15 वर्ष पुराना सपना अब साकार होने जा रहा है। लंबे इंतजार, राजनीतिक बदलाव, लागत में भारी बढ़ोतरी और उद्घाटन की बदली तारीखों के बाद यह महत्वाकांक्षी परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य सरकार और केंद्र ने उद्घाटन की तैयारियां तेज कर दी हैं।
रिफाइनरी परियोजना की घोषणा वर्ष 2010-11 के दौरान हुई थी। इसके बाद अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में दो बार शिलान्यास हुआ और उद्घाटन की तारीखें भी बदलीं। परियोजना कई बार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बनी। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरियों, कोविड-19 महामारी और तकनीकी कारणों से निर्माण कार्य में लगातार देरी हुई, जिससे परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 79,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड द्वारा विकसित की गई है। इसकी क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। इसके साथ ही 2.4 एमएमटीपीए क्षमता का पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किया गया है, जिससे राजस्थान में पेट्रोकेमिकल उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
रोजगार के अवसर पैदा होंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि रिफाइनरी शुरू होने से राजस्थान में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही राज्य में डाउनस्ट्रीम उद्योगों, प्लास्टिक पार्क और परिवहन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना को पश्चिमी भारत के औद्योगिक विकास के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रिफाइनरी परिसर का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। वर्षों की देरी और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद अब यह परियोजना राजस्थान के औद्योगिक विकास में एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है।