Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पर्यटन को नई पहचान देने के उद्देश्य से विकसित कमियाना हिल टॉप नेचर ट्रेल अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी इस नेचर ट्रेल का निर्माण प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने की सोच के साथ किया गया है। ट्रेल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि बच्चे, युवा और वरिष्ठ नागरिक सभी आसानी से इसका आनंद ले सकें।शिमला के ऑकलैंड टनल से लगभग आठ किलोमीटर दूर पोआबो पंचायत क्षेत्र में स्थित इस ट्रेल तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। देवदार, चीड़ और बांज के घने जंगलों से होकर गुजरने वाला यह मार्ग पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच सुकूनभरा अनुभव प्रदान करता है।
हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग द्वारा लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से विकसित कमियाना हिल टॉप नेचर ट्रेल के प्रथम चरण का लोकार्पण किया। करीब आठ हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस परियोजना का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना है।इस ट्रेल की सबसे बड़ी विशेषता यहां से दिखाई देने वाले हिमालय के विहंगम दृश्य हैं। पर्यटक यहां से शाली शिखर, महालू शिखर, मशोबरा, नालदेहरा और आसपास की पर्वत श्रृंखलाओं का मनोरम नजारा एक ही स्थान से देख सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर बनाए गए वॉच टावर प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का अवसर प्रदान करते हैं।पर्यटकों के आकर्षण को बढ़ाने के लिए ट्रेल परिसर में बोनसाई उद्यान भी विकसित किया गया है, जहां लगभग 15 प्रजातियों के 40 बोनसाई पौधे लगाए गए हैं। साथ ही कैक्टस गार्डन, ऑर्किडेरियम और मशरूम उद्यान भी तैयार किए जा रहे हैं। आगंतुकों को हिमाचल की जैव विविधता से परिचित कराने के लिए थ्री-डी डिस्प्ले के माध्यम से राज्य पक्षी मोनाल, जुजुराना और अन्य वन्य प्रजातियों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। योग प्वाइंट भी इस परियोजना का विशेष हिस्सा है।
परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना भी है। ट्रेल के संचालन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है तथा युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
उप वन संरक्षक शिमला अनिकेत वान्वे ने बताया कि इस परियोजना के लिए भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत लगभग पांच करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूत करना है।उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे “Roam the Hills, Respect the Hills” के संदेश को अपनाते हुए स्वच्छता बनाए रखें और कूड़ा-कचरा केवल निर्धारित डस्टबिन में ही डालें, ताकि इस नेचर ट्रेल की प्राकृतिक सुंदरता लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।