Summer express, नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें चार महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। 6 जुलाई को भी देशभर में ईंधन के दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल का स्टॉक इस्तेमाल कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान खरीदा गया था। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर फिलहाल आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है।
गौरतलब है कि 25 मई को सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट (6 जुलाई 2026)
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| बेंगलुरु | 111.68 | 99.56 |
| चेन्नई | 107.76 | 99.55 |
| हैदराबाद | 116.99 | 105.03 |
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर बनी हुई है, जबकि डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.21 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर पर बना हुआ है। वहीं हैदराबाद में पेट्रोल ₹116.99 और डीजल ₹105.03 प्रति लीटर के साथ देश के सबसे महंगे शहरों में शामिल है।
इस बीच, रूस समर्थित नायरा एनर्जी ने अपने करीब 7,000 पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 प्रति लीटर घटाने की घोषणा की है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों की ओर से अभी किसी व्यापक कटौती का संकेत नहीं दिया गया है।
कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सबसे अहम भूमिका निभाती है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी ईंधन कीमतों को सीधे प्रभावित करती है।
जब रुपया कमजोर होता है, तो कच्चा तेल आयात करना महंगा पड़ता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन लागत और स्थानीय मांग-आपूर्ति की स्थिति भी ईंधन की अंतिम खुदरा कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग देखने को मिलते हैं।