Summer express/मंडी /धर्मवीर-: पंडोह डैम में जल्द ही आधुनिक लांगवुड बैरियर और ट्रैश क्लिनिंग मशीन लगाई जाएंगी। यह जानकारी बीबीएमबी के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने आज पंडोह डैम पर बीबीएमबी के 50वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही। मनोज त्रिपाठी ने कहा कि गत वर्षों से पानी के साथ लकड़ियों के बहकर आने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। यह लकड़ियां डैम को नुकसान न पहुंचाएं इसलिए इन्हें सही ढंग से रोकने के लिए आधुनिक लांगवुड बैरियर लगाए जाएंगे। इसके लिए टैंडर प्रक्रिया जारी है। अभी जो लांगवुड बैरियर लगे हैं वह काफी पुराने हैं। उन्होंने बताया कि बग्गी टनल में जो सिल्ट जा रही है उसकी रोकथाम के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसके लिए आधुनिक ट्रैश क्लिनिंग मशीन खरीदने की प्रक्रिया जारी है। इस मशीन के यहां लग जाने से बग्गी टनल में जाने वाली सिल्ट की समस्या से निजात मिलेगी।
मनोज त्रिपाठी ने बताया कि बीबीएमबी के स्लिप-वे बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इन्हें अब आधुनिक तरीके से मुरम्मत करने की जरूरत है ताकि कम से कम चार-पांच वर्षों तक इनकी मुरम्मत की जरूरत न पड़े। पार्वती प्रोजेक्ट में स्टील का इस्तेमाल किया गया है। बीबीएमबी भी कुछ ऐसी ही आधुनिक तकनीक पर विचार कर रहा है। आज पंडोह डैम के लिए वर्ल्ड क्लास तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रबंधन की तरफ से हाई कैपेसिटी इलेक्ट्रिक डेजर मशीन लगाई जाएगी जोकि पर्यावरण के भी अनुकूल होगी। उन्होंने प्रबंधन को सामाजिक कार्यों पर भी अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों पर भी खरा उतरा जा सके।इससे पहले मनोज त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके डैम निर्माण में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान दो मिनट का मौन भी रखा गया। बीबीएमबी सुंदरनगर के चीफ एवं मेंबर इरिगेशन बीएस नारा ने कहा कि आज यह परियोजना अपनी स्थापना के 50 वर्षों के सफर को पूरा कर रही है। 5 दशकों की यह एक अदभुत गाथा है जब ब्यास नदी की लहरों को बल्ह घाटी से होते हुए सतलुज में मिलाया गया था। यह सिर्फ दो नदियों का मिलन नहीं था बल्कि आधुनिक भारत के शिल्पकारों के हौंसलों का संगम था।