लक्की मेहता | लुधियाना
बिंद्रा कॉलोनी की विवादित जमीन का मामला अब पुलिस कार्रवाई और नगर निगम की कथित निष्क्रियता के चलते बड़ा विवाद बन गया है। एक तरफ थाना देहाती पुलिस ने 15 कनाल 12 मरले कृषि भूमि पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा करने की कोशिश के आरोप में छह नामजद समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
वहीं दूसरी ओर उसी विवादित जमीन के करीब 600 गज हिस्से पर हुए अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता हरिदरपाल सिंह का आरोप है कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और गांव काराबारा स्थित खसरा नंबर 42/11, 19-20 (मिन), कुल 15 कनाल 12 मरले जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। आरोप है कि गांव सोरखेवाल के खसरा नंबर 694/352 की जमीन को रिकॉर्ड में दर्शाकर चारदीवारी खड़ी कर कब्जे का प्रयास किया गया।
एफआईआर के बाद भी नहीं टूटी अवैध बिल्डिंग
मामले का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू यह है कि विवादित जमीन के करीब 600 गज हिस्से पर कथित तौर पर नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण कर लिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि निगम के वरिष्ठ अधिकारियों-कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर और एमटीपी शाखा-को पूरे घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद निर्माण नहीं रुकवाया गया।आरोप है कि पहले मौके पर शटरिंग की गई और बाद में लैंटर डालकर निर्माण पूरा कर दिया गया, लेकिन निगम की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
डिमोलिशन नोटिस बना सिर्फ कागज का टुकड़ा
सूत्रों के मुताबिक नगर निगम ने करीब दो सप्ताह पहले अवैध निर्माण को लेकर डिमोलिशन नोटिस जारी किया था, लेकिन नोटिस के बाद भी मौके पर न तो कोई तोड़फोड़ हुई और न ही अवैध निर्माण हटाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निगम ने सिर्फ औपचारिकता निभाई और कार्रवाई को फाइलों तक सीमित रखा।
मामले पर नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर तपन भनोट ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दोबारा सख्ती के साथ कार्रवाई करने और जल्द आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।