Summer express/मंडी, धर्मवीर- :प्रदेश कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अपने गृह विधानसभा क्षेत्र के ही युवाओं को आउटसोर्स पर रोजगार देने वाले वायरल बयान पर सियासत गरमा गई है। जनसभा में मंत्री द्वारा दिए इस बयान के बाद भाजपा ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया है। मंडी में मंगलवार को मीडिया के माध्यम से मंत्री हर्षवर्धन और सुक्खू सरकार को घेरते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय राणा ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पूर्व युवाओं को 58 साल वाली पक्की नौकरी देने की बात कही थी। लेकिन अपनी अन्य गारंटियों की तरह युवाओं को रोजगार देने वाली गारंटी भी कांग्रेस की यह सरकार पूरा नहीं कर पायी है। आज सरकार के करीब 4 वर्ष बीत जाने के बाद युवा कांग्रेस से चुनावी वादे का जवाब मांग रहे है।
मंडी में मीडिया से रूबरू होते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने घेरी मंत्री व सुक्खू सरकार को
उन्होंने कहा कि स्वयं प्रदेश सरकार के एक मंत्री का सार्वजनिक बयान सामने आया है कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के लगभग 600-700 लोगों को आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार दिलाया। यदि यह बयान सही है, तो सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए कि यह प्रक्रिया क्या थी, किन नियमों के तहत नियुक्तियां हुई और क्या प्रदेश के सभी युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराए गए। अजय राणा ने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी भी युवा के रोजगार के खिलाफ नहीं है। जिसने भी नियमों के अनुसार नौकरी प्राप्त की है, उसका सम्मान होना चाहिए। लेकिन भाजपा का प्रश्न पूरी भर्ती व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर है। हिमाचल प्रदेश केवल किसी एक विधानसभा क्षेत्र का नहीं है। मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा, सिरमौर, किन्नौर, शिमला, सोलन, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति सहित पूरे प्रदेश का प्रत्येक युवा समान अवसर का हकदार है। कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन इस तरह के बयान दे रहे हैं ,यह बेहद चिंताजनक है। एक ओर कांग्रेस सरकार चुनावों में नियमित रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने का वादा करती है, जबकि दूसरी ओर आउटसोर्स व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ती दिखाई देती है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नियमित भर्तियों को लेकर उसकी नीति क्या है और आउटसोर्सिंग की भूमिका क्या है। अजय राणा ने कहा कि भाजपा की मांग केवल इतनी है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो पारदर्शिता से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यदि चुनावी वादों और वास्तविक नीतियों में अंतर है, तो सरकार को प्रदेश के युवाओं के सामने इसका जवाब देना होगा।