राहुल शर्मा | लुधियाना
1 जुलाई को हुसैनपुरा (मल्होत्रा पैलेस के पास) स्थित कथित अवैध कॉलोनी को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद भी ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (ग्लाडा) की कार्रवाई केवल आश्वासन तक सीमित दिखाई दे रही है। जिस कॉलोनी पर कार्रवाई का दावा किया गया था, वहां अब अंदरूनी सड़कों का निर्माण खुलेआम जारी है। वहीं, इससे सटी शिव शक्ति कॉलोनी में भी बिना आवश्यक मंजूरियों के प्लॉटों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने ग्लाडा अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं।
{15 दिन बाद भी नहीं दिखी कार्रवाई: 1 जुलाई को श्री आत्म वल्लभ कॉलेज के सामने विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी को लेकर मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया था। लेकिन करीब 15 दिन बीत जाने के बावजूद मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट कॉलोनी में विकास कार्य और तेज हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण रुकवाया जाता तो कॉलोनी का स्वरूप इतना आगे नहीं बढ़ता।
{पहले सड़कें तैयार, फिर प्लॉट बेचने की तैयारी: मौके पर फिलहाल भवन निर्माण शुरू नहीं हुआ है, लेकिन कॉलोनी को विकसित दिखाने के लिए तेजी से अंदरूनी सड़कें बनाई जा रही हैं। बिना स्वीकृत ले-आउट प्लान और सरकारी मंजूरी के खेतों में मिट्टी व कंक्रीट डालकर रास्ते तैयार किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़कें तैयार होने के बाद इन प्लॉटों को फैक्ट्री और कमर्शियल उपयोग के नाम पर ऊंची कीमतों में बेचने की तैयारी की जा रही है।
{बुनियादी सुविधाओं का अभाव: कॉलोनी में न सीवरेज नेटवर्क है, न पेयजल की व्यवस्था और न ही अन्य आवश्यक शहरी सुविधाएं। टाउन प्लानिंग के नियमों की अनदेखी कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में यहां उद्योग स्थापित होते हैं तो गंदे पानी और औद्योगिक कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं होगी, जिससे आसपास के क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है।
{शिव शक्ति कॉलोनी में भी बिना मंजूरी बिक रहे प्लॉट: हुसैनपुरा से सटी शिव शक्ति कॉलोनी में भी बिना आवश्यक स्वीकृतियों के प्लॉटों की बिक्री जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां भी नियमों की अनदेखी कर कॉलोनी विकसित की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कॉलोनी को न रेरा की मंजूरी प्राप्त है और न ही ग्लाडा की
आवश्यक स्वीकृतियां। इसके बावजूद खरीदारों को आकर्षित कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
{सस्ते प्लॉट का लालच, सुविधाएं नदारद: स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी में न पेयजल की समुचित व्यवस्था है, न सीवरेज नेटवर्क और न ही सरकारी मानकों के अनुरूप सड़कें विकसित की गई हैं। इसके बावजूद कम कीमत का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
{अधिकारी जाते हैं, अगले दिन फिर शुरू हो जाता है काम: क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि अवैध निर्माण और बिजली के खंभे लगाए जाने की शिकायतें कई बार संबंधित विभागों को दी गईं, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अधिकारी मौके पर आते हैं, कुछ देर निरीक्षण करते हैं और लौट जाते हैं। अगले ही दिन निर्माण कार्य पहले की तरह शुरू हो जाता है।
{खरीदारों की जमा-पूंजी पर मंडरा रहा खतरा: सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कम कीमत के लालच में मध्यमवर्गीय परिवार अपनी जीवनभर की बचत ऐसे प्लॉटों में लगा देते हैं। बाद में यदि प्रशासन कार्रवाई करता है तो सबसे अधिक नुकसान खरीदारों को उठाना पड़ता है, जबकि कॉलोनी विकसित करने वाले पहले ही मुनाफा कमाकर निकल जाते हैं।
{निगम ने दिखाई सख्ती, ग्लाडा की चुप्पी पर सवाल: हाल ही में नगर निगम ने अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले में संबंधित अधिकारी को निलंबित कर सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि हुसैनपुरा और शिव शक्ति कॉलोनी में लगातार शिकायतों के बावजूद ग्लाडा अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया।